झारखंड में कोचिंग संस्थानों पर नया कानून लागू

अब तय होगी फीस, सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक ही चलेंगे क्लास
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य भर में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर लगाम कसने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। विधानसभा ने मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को “झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक-2025” को मंजूरी दे दी। इस कानून के लागू होने के बाद अब राज्य में 50 से अधिक छात्रों वाले सभी कोचिंग संस्थान सरकार के नियामकीय ढांचे के तहत आएंगे।

काफी समय से अभिभावक और छात्र कोचिंग सेंटरों की मनमानी फीस, अव्यवस्थित प्रबंधन और भीड़भाड़ वाली कक्षाओं को लेकर शिकायत कर रहे थे। ऐसे में यह नया कानून राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अनुशासित करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने वाला साबित हो सकता है।
फीस और बैंक गारंटी पर नियंत्रण
नए कानून के अनुसार, अब कोई भी कोचिंग संस्थान मनमाने तरीके से फीस नहीं वसूल सकेगा। संस्थान को निर्धारित शुल्क संरचना रेगुलेटरी कमेटी को देनी होगी और इसे अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करना होगा।
इसके अलावा, संस्थान खोलने के लिए पांच साल के लिए पांच लाख रुपये बैंक गारंटी के रूप में जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह गारंटी छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा के लिए होगी, ताकि विवाद की स्थिति में आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके।
- संस्थान की स्थापना और पंजीकरण
- हर कोचिंग सेंटर का अलग रजिस्ट्रेशन होगा।
- जिला और राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटी बनाई जाएगी जो संस्थानों की निगरानी करेगी।
- 50 से अधिक छात्रों वाले सभी संस्थान इस दायरे में आएंगे।
- क्लास का समय और सुविधाएं
कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि कोचिंग संस्थान अब सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक ही क्लास चला सकेंगे। देर रात तक चलने वाली कक्षाओं पर रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा, छात्रों की भीड़भाड़ रोकने के लिए तय किया गया है कि हर विद्यार्थी को कम से कम एक वर्ग मीटर जगह बैठने के लिए अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
- नाबालिग छात्रों और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
- नए कानून में नाबालिग छात्रों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
- 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पढ़ाने से पहले अभिभावकों की लिखित अनुमति जरूरी होगी।
- 1000 से अधिक छात्रों वाले बड़े कोचिंग सेंटरों को एक मनोचिकित्सक (Psychiatrist) रखना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा सके।


शिकायत निवारण और पारदर्शिता
प्रत्येक कोचिंग संस्थान को अपने यहां एक शिकायत निवारण सेल (Grievance Cell) बनाना होगा। इसके साथ ही ट्यूटर, फीस, कोर्स और आधारभूत संरचना की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करानी होगी।

क्यों जरूरी था यह कानून?
पिछले कई वर्षों से झारखंड में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लेकिन ज्यादातर संस्थान बिना किसी नियम-कायदे के संचालित हो रहे थे।
- मनमाने शुल्क की वसूली
- भीड़भाड़ वाली कक्षाएं
- कमजोर आधारभूत संरचना
- मानसिक दबाव के कारण छात्रों में आत्महत्या के मामले


इन सभी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून न केवल कोचिंग की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि छात्रों और अभिभावकों को भी राहत देगा।
आगे का रास्ता
अब सरकार कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करेगी और रेगुलेटरी कमेटियां जल्द ही काम करना शुरू करेंगी। माना जा रहा है कि यह कदम झारखंड को शिक्षा सुधार के नए युग की ओर ले जाएगा।