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पारस हॉस्पिटल रांची में ब्लड कैंसर से जूझ रहे 10 वर्षीय बच्चे का सफल इलाज

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के पारस हॉस्पिटल एचईसी में एक बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि दर्ज की गई है। यहां ब्लड कैंसर से जूझ रहे 10 वर्षीय बच्चे का सफल इलाज किया गया है। डालटेनगंज, पलामू का रहने वाला यह बच्चा पिछले छह महीनों से कैंसर के खिलाफ जंग लड़ रहा था और अब पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है।

इस बच्चे का इलाज पारस हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. गुंजेश कुमार सिंह की देखरेख में किया गया। जब बच्चा पहली बार हॉस्पिटल आया था, तब उसकी हालत गंभीर थी। उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी, चेहरा सूज चुका था और सीटी स्कैन में सामने आया कि उसके सीने के ऊपरी हिस्से में एक बड़ा गांठ (ट्यूमर) बन चुका है। इसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत बायोप्सी की और रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि उसे ब्लड कैंसर है।

डॉ. गुंजेश ने बताया कि “मरीज की स्थिति देखकर परिवार पूरी तरह निराश था। लेकिन हमने तुरंत कीमोथेरेपी शुरू की और धीरे-धीरे कैंसर को नियंत्रित कर लिया गया। आज बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, स्कूल जा रहा है और खेलकूद में भी भाग ले रहा है। यह हमारे लिए भी संतोषजनक पल है।”

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इलाज की खास बात यह रही कि पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। यानी परिवार को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। बच्चे के परिजनों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमने उम्मीद खो दी थी। लगा कि अब हमारा बेटा नहीं बचेगा। लेकिन पारस हॉस्पिटल और डॉक्टरों की टीम ने हमारे बच्चे को नई जिंदगी दी। हम जीवनभर उनके आभारी रहेंगे।”

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पारस हॉस्पिटल की ओर से फैसिलिटी निदेशक डॉ. नीतेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में कैंसर से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी जैसे तीनों विभागों की संयुक्त विशेषज्ञ टीम मरीजों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया करा रही है। इसके अलावा अस्पताल में पेट-स्कैन जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधा भी मौजूद है, जिससे कैंसर का सही समय पर और सटीक निदान हो सके।

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उन्होंने कहा कि पारस हॉस्पिटल रांची लगातार अपनी सुविधाओं और तकनीक को अपग्रेड कर रहा है ताकि मरीजों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत न पड़े। “हमारा लक्ष्य है कि झारखंड में ही विश्वस्तरीय कैंसर उपचार उपलब्ध कराया जाए और मरीज को दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य राज्य की ओर रुख न करना पड़े।”

इसी कड़ी में अस्पताल के मार्केटिंग हेड मानस लाभ ने कहा कि पारस हॉस्पिटल में झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों से भी मरीज आकर इलाज करा रहे हैं। “यहां कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सभी तरह की विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को अब राज्य के बाहर जाने की जरूरत नहीं है।”

यह सफलता सिर्फ एक परिवार की खुशियों की वापसी नहीं है, बल्कि झारखंड के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में जहां कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज सीमित था, वहीं अब रांची जैसे शहर में ही इसका सफल इलाज संभव हो पा रहा है।

10 वर्षीय बच्चे की यह जीवन यात्रा यह साबित करती है कि समय पर इलाज, सही तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की टीम मिलकर सबसे कठिन बीमारियों पर भी विजय पा सकती है। यह उदाहरण न केवल पारस हॉस्पिटल की क्षमताओं को रेखांकित करता है, बल्कि झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के बदलते परिदृश्य की ओर भी इशारा करता है।

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