ईडी जांच ने खोला राज : दिनेश गोप ठेकेदारों से करता था करोड़ों की उगाही

रांची : झारखंड में सक्रिय उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआइ) का मुखिया दिनेश गोप प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट में एक बार फिर सुर्खियों में आया है। रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि गोप हर साल लगभग दो करोड़ रुपये की लेवी वसूली करता था। यह लेवी न केवल सरकारी योजनाओं से जुड़े ठेकेदारों से ली जाती थी, बल्कि खनन और निर्माण कारोबार करने वालों से भी संगठित ढंग से वसूली की जाती थी।

ठेकेदारों पर था दबाव, दो प्रतिशत लेवी की अनिवार्यता
ईडी की रिपोर्ट बताती है कि दिनेश गोप और उसका संगठन पीएलएफआइ ठेकेदारों से दो प्रतिशत की दर से लेवी वसूलते थे। सड़क, पुल, भवन निर्माण, रेलवे लाइन जैसी बड़ी योजनाओं पर काम कर रहे ठेकेदार इनके मुख्य निशाने पर रहते थे। ठेकेदारों को धमकाकर या फिर मशीनें जलाने जैसी घटनाओं से डराकर वसूली सुनिश्चित की जाती थी। कई ठेकेदार संगठन के खौफ से स्वेच्छा से ही रकम चुका देते थे।
खनन कारोबार से भी होती थी मोटी कमाई
ईडी की जांच में सामने आया है कि गोप का नेटवर्क केवल सरकारी ठेकों तक सीमित नहीं था। कोयला, बॉक्साइट, आयरन ओर, बालू और स्टोन कारोबार से जुड़े व्यापारी भी इनकी उगाही का शिकार होते थे। खनन कारोबारियों से भी समान अनुपात में लेवी वसूली जाती थी, जिससे हर साल करोड़ों रुपये का काला धन संगठन के पास जमा होता था।
शेल कंपनियों से होती थी मनी लाउंड्रिंग
वसूली गई रकम को केवल खर्च करने के बजाय, दिनेश गोप ने एक संगठित मनी लाउंड्रिंग सिस्टम विकसित किया था। ईडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पैसा शेल कंपनियों के माध्यम से वैध कारोबार में निवेश दिखाकर सफेद किया जाता था। इन कंपनियों के नाम उसके विश्वस्त लोगों के नाम पर थे। इस प्रक्रिया के जरिए अवैध वसूली को कानूनी आय में बदल दिया जाता था।


संगठित नेटवर्क और लेवी कलेक्टर
दिनेश गोप ने झारखंड और आसपास के राज्यों में लेवी कलेक्टर्स का एक नेटवर्क खड़ा कर रखा था। छोटे स्तर के उग्रवादी लेवी की वसूली करते थे और रकम ऊपर तक पहुंचाते थे। इस नेटवर्क में बिचौलियों की भी भूमिका थी, जो कारोबारी और संगठन के बीच संपर्क का काम करते थे। रकम का एक हिस्सा स्थानीय स्तर पर खर्च होता था, जबकि बड़ी राशि सीधे गोप तक पहुंचती थी।

गिरफ्तारी के बाद खुला राज
दिनेश गोप लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर था। पिछले साल दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने पूछताछ शुरू की और उसके ठिकानों की तलाशी में कई अहम दस्तावेज हाथ लगे। इन्हीं दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि गोप के जरिए चलाया जाने वाला लेवी नेटवर्क न केवल विकास कार्यों को प्रभावित करता था, बल्कि सरकार की योजनाओं की रफ्तार को भी धीमा कर देता था।


कौन है दिनेश गोप?
- झारखंड का कुख्यात उग्रवादी, पीएलएफआइ का सुप्रीमो।
- हत्या, लूट, फिरौती और नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई संगीन मामलों में आरोपी।
- लंबे समय तक फरार रहने के बाद 2023 में दिल्ली से गिरफ्तार।
- झारखंड और पड़ोसी राज्यों में आतंक और वसूली नेटवर्क का सरगना।
ईडी की यह रिपोर्ट बताती है कि झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य में उग्रवाद और लेवी वसूली की समस्या कितनी गंभीर है। ठेकेदारों और कारोबारियों पर लेवी का बोझ पड़ने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती रही। ठेकेदार अक्सर सुरक्षा की कमी के कारण परियोजनाओं से हाथ खींच लेते थे, जिससे सड़क, बिजली और अन्य योजनाओं पर सीधा असर पड़ता था।
ईडी की अगली कार्रवाई
ईडी अब दिनेश गोप द्वारा बनाई गई शेल कंपनियों और मनी लाउंड्रिंग के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह भी संभावना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कारोबारी, बिचौलिए और सहयोगी एजेंसी के राडार पर आएंगे।
ईडी की रिपोर्ट ने झारखंड में नक्सली फंडिंग और लेवी वसूली के संगठित तंत्र को उजागर किया है। यह साफ हो गया है कि विकास योजनाओं और खनन कारोबार पर उग्रवाद का असर सीधे राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता रहा है। अब चुनौती सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने है कि इस तरह के नेटवर्क को जड़ से खत्म कर विकास कार्यों को बिना बाधा आगे बढ़ाया जा सके।