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हिरणपुर की सड़कों का बदहाल हाल: विकास की राह में कीचड़ और खाई

Hiranpur Road Condition

सड़क नहीं, मुसीबत है ये रास्ता! हिरणपुर बाजार की मुख्य सड़क वर्षों से बेहाल, प्रशासनिक अनदेखी से जनता त्रस्त


रिपोर्टर: सुमित भगत

पाकुड़ : हिरणपुर बाजार की मुख्य सड़क इस समय केवल एक राह नहीं, बल्कि एक दुर्घटनाओं से भरी चुनौती बन चुकी है। वर्षों से इस सड़क की हालत बदतर बनी हुई है, जहां हर मौसम में राहगीरों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। पूर्व में यह सड़क पीडब्लूडी (PWD) विभाग के अधीन थी, लेकिन अब इसे एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) में शामिल किया जा चुका है। बावजूद इसके, सड़क निर्माण का कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। रानीपुर से लेकर हाथकाठी हाईस्कूल मोड़ तक करीब दो किलोमीटर लंबा यह मार्ग पूरी तरह से खस्ताहाल है। सड़क में इतने गहरे गड्ढे और कीचड़ हैं कि किसी नवागत को यह समझना मुश्किल है कि वह सड़क पर है या किसी सूखे तालाब में।

दुर्घटनाओं की डरावनी दास्तां
हर दिन इस रास्ते से स्कूली बच्चे, व्यापारी, ग्रामीण और महिलाएं गुजरते हैं। बरसात के दिनों में सड़क पर इतना पानी और कीचड़ भर जाता है कि पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। कविगुरु रवींद्र चौक, सुभाष चौक, मध्य विद्यालय के पास की स्थिति सबसे भयावह बनी हुई है। कई बार वाहन पलटने और पैदल चल रहे लोगों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे जानमाल का नुकसान हुआ है।

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प्रशासनिक पहल और अधूरी योजनाएं
हालांकि उपायुक्त मनीष कुमार के निर्देश पर सड़क के दोनों ओर पक्की नाली का निर्माण कर सफाई की समस्या को कुछ हद तक हल किया गया है। लेकिन मुख्य सड़क का निर्माण अधर में लटका हुआ है। एनएच विभाग ने पहले आंशिक मरम्मत के तहत सड़क में पत्थर और डस्ट भरकर स्थिति सुधारने का प्रयास किया था, परंतु भारी वाहनों की लगातार आवाजाही ने इसे कुछ ही दिनों में फिर से बदहाल बना दिया।

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एनएच विभाग का जवाब
एनएच देवघर के कार्यपालक अभियंता रवि पद से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि एनएच बाईपास सड़क निर्माण का कार्य जल्द प्रारंभ किया जाएगा। लेकिन मुख्य बाजार सड़क के लिए अब तक कोई स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग प्रयास कर रहा है, लेकिन इसमें समय लग सकता है।

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जनता की मांग: जल्द हो स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में बड़े विरोध प्रदर्शन होंगे। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि एक पक्की, सुरक्षित और टिकाऊ सड़क चाहती है। झारखंड सरकार एवं राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को चाहिए कि वह हिरणपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में सड़क जैसे बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दें। सड़क विकास केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न हो, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में भी बराबरी से काम हो।

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यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे एक उपेक्षित सड़क न केवल विकास में बाधा बनती है, बल्कि लोगों की जिंदगी को भी खतरे में डालती है।

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