झारखंड में साइबर ठगी का नया हथकंडा: कृषि मंत्री का सचिव बनकर ठगों ने गव्य किसानों से मांगा पैसा, विभाग ने दर्ज कराया मामला

कृषि मंत्री का सचिव बनकर कर रहे पैसों की मांग, विभाग ने दी चेतावनी
हजारीबाग/रांची: झारखंड में साइबर अपराधियों ने अब किसानों को ठगने का नया तरीका अपनाया है। यह मामला तब सामने आया जब ठगों ने खुद को राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का सचिव बताते हुए गव्य किसानों से योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर पैसों की मांग की।

जिला गव्य विकास पदाधिकारी राज नारायण सास्वत ने बताया कि मंगलवार को जिले के कई गव्य किसानों को अलग-अलग मोबाइल नंबरों (7063219301 और व्हाट्सएप नंबर 9038197598) से कॉल और मैसेज प्राप्त हुए। फोन करने वाले ने खुद को मंत्री का सचिव मनोरंजन कुमार बताया और दावा किया कि किसानों की गव्य योजना स्वीकृत हो चुकी है। लेकिन इसके लाभ के लिए पहले से निर्धारित शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य बताया गया।
विभाग ने दर्ज कराया मामला
जिला गव्य विकास विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सदर थाना में शिकायत दर्ज कराई है। विभाग का कहना है कि यह ठगी का संगठित प्रयास है, जिसमें किसानों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर फंसाया जा रहा है।
किसानों को चेतावनी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को किसी भी प्रकार का शुल्क या अग्रिम भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। सभी प्रक्रियाएँ विभागीय स्तर पर पारदर्शी और निशुल्क की जाती हैं। जिला गव्य विकास पदाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात नंबर से आए कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और इस प्रकार की घटनाओं की तुरंत सूचना स्थानीय प्रशासन को दें।


साइबर अपराधियों का बदलता पैटर्न
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराधियों ने कई बार आम लोगों और सरकारी विभागों को निशाना बनाया है। अब किसानों को योजनाओं का लालच देकर ठगने का यह तरीका नई चुनौती बनकर सामने आया है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों का एक बड़ा नेटवर्क है, जो राज्यभर के किसानों को निशाना बना सकता है।

प्रशासन की अपील
प्रशासन ने किसानों से विशेष रूप से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी योजना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल जिला गव्य विकास विभाग के कार्यालय या सरकारी पोर्टल से ही संपर्क करें।इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में साइबर ठगी का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब यह ग्रामीण इलाकों और किसानों तक पहुँच चुका है। ऐसे में प्रशासन और विभागों की सक्रियता ही किसानों को सुरक्षित रख सकती है।