आज से तीन दिनों तक उत्पाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया स्थगित, 12 अभ्यर्थियों की मौत के बाद नींद से जागी सरकार

दौड़ में मौत 1

रांचीः राज्य के अलग-अगल जिलों में विगत दिनों उत्पाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के लिए दौड़ आयोजित की गई थी। उत्पाद विभाग में बतौर सिपाही के पद पर नौकरी लिए कुल 583 सीटें तय की गई हैं। फिलहाल राज्य में उत्पाद सिपाही के कुल 622 पद सृजित हैं. जिसमें 589 पद रिक्त हैं। इसके लिए दौड़ का आयोजन राज्य के अलग-अलग स्थानों पर हो रहा था। दौड़ में पास करने के लिए अभ्यर्थियों को एक घंटे में 10 किलोमीटर का टारगेट दिया गया था। अभ्यर्थी एक अदद नौकरी पाने के लिए जी जान लगाकर दौड़ में उत्तीर्ण होना चाहते थे। लेकिन कई अभ्यर्थियों के किश्मत में नौकरी पाना शायद नहीं लिखा था। अगर होता तो वे दौड़ में पास हो गए होते और उनकी मौत भी नहीं होती।

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अबतक कुल 12 अभ्यर्थियों ने सिपाही भर्ती की दौड़ में अपनी जान गवां दी है। नौकरी के नाम पर सरकारें गरीब व जरूरतमंद अभ्यर्थियों के करियर से खिलवाड़ कर रही है। एक बाद एक जब 12 अभ्यर्थियों की मौत हो गई तब सरकार की भी नींद खुल गई।इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने सोमवारी की रात को अपने ट्वीटर हैंडल से एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने अगले तीन दिनों तक यानी उत्पाद सिपाही भर्ती चयन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। सीएम ने क्या अपने पोस्ट में

उत्पाद सिपाही भर्ती

जोहार साथियों,
उत्पाद सिपाही की नियुक्ति प्रक्रिया में दौड़ के क्रम में प्रतिभागियों की असामयिक मृत्यु दुःखद और मर्माहत करने वाली है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनाये गये नियमावली की अविलंब समीक्षा का निर्देश देते हुए हमने इस ढंग की भविष्य की सभी बहालियों के लिए नियमावली में बदलाव करने का निर्देश दिया है, साथ ही इस प्रक्रिया में दुर्भाग्यवश पीड़ित और शोकाकुल परिवार को सरकार की तरफ से तत्काल राहत पहुंचाने के लिए प्रस्ताव बनाने का भी निर्देश दिया गया है।

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एहतियातन अगले 3 दिनों के लिए हमने इस भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करने का निर्देश दिया है। दौड़ का आयोजन अब प्रातः 9 बजे के बाद किसी भी सूरत में नहीं की जाएगी। जिन अभ्यर्थियों को दौड़ के पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण की जरूरत महसूस होगी उनके लिए चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था होगी तथा सभी प्रतियोगिता स्थलों पर प्रतिभागियों के लिए नाश्ते/फल का व्यवस्था होगी जिससे कि कोई भूखे पेट दौड़ में हिस्सा न ले।

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आखिर किन कारणों से हमारे गांव – समाज के अपेक्षाकृत स्वस्थ / चुस्त लोग, पूर्व से चली आ रही शारीरिक परीक्षा में हताहत हो जा रहे हैं, आखिर झारखंड सहित देश में पिछले 3-4 वर्षों में सामान्य जन के स्वास्थ्य में ऐसा क्या बदलाव आया है ? इन युवाओं की असामयिक मृत्यु के कारणों की समीक्षा करने के लिए, जिससे की भविष्य में ऐसी दुर्घटना घटित न हो, हमने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भी एक समिति का गठन कर परामर्श रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया है।

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