नीरज सिंह हत्याकांड: झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह बरी, कोर्ट में सबूत के अभाव में आया फैसला

नीरज सिंह

रांची/धनबाद: धनबाद के बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड मामले में बड़ा फैसला आया है। झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह को अदालत ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

गुरुवार को संजीव सिंह एंबुलेंस से कोर्ट पहुंचे थे। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। फैसले के बाद संजीव सिंह के समर्थकों में जबरदस्त खुशी देखने को मिली। कई स्थानों पर लोगों ने पटाखे फोड़कर और मिठाइयाँ बांटकर खुशी का इजहार किया।

पृष्ठभूमि: कब और कैसे हुआ था हत्याकांड?
धनबाद नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या वर्ष 2017 में हुई थी। 21 मार्च 2017 की शाम सिटी सेंटर के पास उनकी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस हमले में नीरज सिंह के अलावा उनके तीन अंगरक्षक भी मारे गए थे। घटना ने पूरे झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलकों को हिला दिया था।

नीरज सिंह कांग्रेस से जुड़े हुए थे और झरिया की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। हत्या के पीछे राजनीतिक वर्चस्व और वर्चस्व की लड़ाई को अहम कारण माना गया था।

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पुलिस जांच और चार्जशीट
हत्या के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच की थी। पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। वहीं 6 अभियुक्तों के खिलाफ जांच अब भी अधूरी है।

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जांच एजेंसियों ने कहा था कि इसमें कई बिंदुओं पर अभी भी पड़ताल बाकी है।

संजीव सिंह को इस मामले का मुख्य आरोपी माना गया था। घटना के बाद उन्हें जेल भेजा गया था और लंबे समय तक रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में रखा गया।

फैसले के मायने
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष सबूतों के आधार पर संजीव सिंह की संलिप्तता सिद्ध नहीं कर पाया। लिहाजा उन्हें बरी किया जाता है।

यह फैसला झरिया और धनबाद की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। एक ओर जहां समर्थक इसे “न्याय की जीत” बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष अब भी इस फैसले पर सवाल खड़े कर सकते हैं।

आगे की स्थिति
फिलहाल अदालत से राहत मिलने के बाद संजीव सिंह की राजनीति में सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी ओर, जिन छह अभियुक्तों पर जांच बाकी है, उनके खिलाफ पुलिस और अदालत की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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