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पूर्व रांची DC राय महिमापत रे के खिलाफ ACB की कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में PE दर्ज

ACB investigation

झारखंड में एसीबी की लगातार कार्रवाई, अब 2011 बैच के IAS अधिकारी राय महिमापत रे पर जांच की बारी

रांची: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी (Anti-Corruption Bureau) की मुहिम लगातार तेज़ हो रही है। राज्य में शराब घोटाले, हजारीबाग लैंड स्कैम, और कई अन्य चर्चित मामलों में कार्रवाई के बाद अब एसीबी ने पूर्व रांची डीसी राय महिमापत रे के खिलाफ भी प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry – PE) दर्ज कर ली है।

राज्य सरकार से मिली अनुमति के बाद दर्ज हुई पीई
सूत्रों के अनुसार, एसीबी ने राय महिमापत रे के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद औपचारिक रूप से PE दर्ज कर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ ही इस मामले में नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

वित्तीय अनियमितता का मामला, जांच के दायरे में आई फाइलें
राय महिमापत रे के खिलाफ दर्ज PE वित्तीय अनियमितता से जुड़े एक मामले से संबंधित बताई जा रही है। ACB की टीम उन दस्तावेज़ों और फाइलों की जांच कर रही है, जिन पर उनके हस्ताक्षर या स्वीकृति बताई जाती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह अनियमितता किस परियोजना या योजना से जुड़ी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला रांची डीसी कार्यकाल (2018–2020) से संबंधित है।

कौन हैं राय महिमापत रे
राय महिमापत रे 2011 बैच के झारखंड कैडर के IAS अधिकारी हैं।
उन्होंने फरवरी 2018 से जुलाई 2020 तक रांची जिला उपायुक्त (DC) के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे केंद्र सरकार के प्रतिनियुक्ति पर गए और वर्तमान में वर्ल्ड बैंक में सीनियर डिजिटल डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं।

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ACB की अब तक की कार्रवाई — तीन IAS अधिकारी जेल भेजे जा चुके
इस वर्ष झारखंड एसीबी ने तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों को भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इनमें राज्य के वरीय IAS अधिकारी विनय चौबे भी शामिल हैं, जिन्हें कुछ महीने पहले फंड डायवर्जन और रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। एसीबी की लगातार होती इन कार्रवाइयों से प्रशासनिक हलकों में खलबली मची हुई है।

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PE दर्ज होने के बाद क्या होता है
PE (Preliminary Enquiry) दर्ज होने का मतलब होता है कि एसीबी के पास प्राथमिक साक्ष्य मौजूद हैं जो जांच की आवश्यकता दर्शाते हैं। इस दौरान अधिकारी की पूर्व स्वीकृत फाइलें, संपत्ति विवरण, बैंक ट्रांजेक्शन और सरकारी खर्चे की गहन जांच की जाती है। अगर जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो FIR दर्ज कर गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया शुरू होती है।

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राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों पर बढ़ी सख्ती
झारखंड में बीते एक वर्ष से एसीबी ने वरिष्ठ नौकरशाहों और ठेकेदार नेटवर्क पर नकेल कसना शुरू किया है। शराब टेंडर घोटाला, लैंड स्कैम, पेंशन फंड दुरुपयोग और सरकारी आवास आवंटन में गड़बड़ियों के कई मामलों मेंएसीबी पहले ही चार्ज शीट दाखिल कर चुकी है। राय महिमापत रे के खिलाफ यह कार्रवाई उसी कड़ी का अगला कदम मानी जा रही है।

आगे क्या — वर्ल्ड बैंक में तैनाती पर भी पड़ सकता है असर
राय महिमापत रे वर्तमान में वर्ल्ड बैंक (World Bank) में कार्यरत हैं। ACB द्वारा PE दर्ज होने के बाद अब यह जांच उनके विदेशी प्रतिनियुक्ति और पदस्थापना पर असर डाल सकती है। यदि जांच में आरोप गंभीर पाए गए, तो केंद्र सरकार और वर्ल्ड बैंक, दोनों संस्थाएं उनसे स्पष्टीकरण या जवाब मांग सकती हैं।

ACB की निगरानी में पूरा नेटवर्क
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, एसीबी अब उन निजी एजेंसियों और फर्मों की भी जांच कर रही है जिनसे रांची डीसी कार्यकाल में आर्थिक लेन-देन हुआ था। जांच टीम ने बैंक खातों, संपत्ति रजिस्ट्रियों और टेंडर रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में लिया है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
राय महिमापत रे के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर कुछ अधिकारी इसे “प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम” मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई इसे “वरिष्ठ अधिकारियों पर बढ़ते दबाव का संकेत” बता रहे हैं।

एसीबी द्वारा पूर्व रांची डीसी राय महिमापत रे के खिलाफ PE दर्ज किए जाने से झारखंड की नौकरशाही में हलचल मच गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी यह मुहिम आने वाले समय में कई और बड़े नामों को घेरे में ले सकती है। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रारंभिक जांच आगे क्या रूप लेती है।

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