CBI कोर्ट ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का, पत्नी और पूर्व LRDC को ठहराया दोषी

जमीन घोटाला जमीन घोटाला

15 साल पुराने CNT एक्ट उल्लंघन मामले में 9 आरोपी दोषी, 30 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

रांची: झारखंड की राजनीति से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का और रांची के तत्कालीन LRDC कार्तिक कुमार प्रभात समेत 9 आरोपियों को दोषी करार दिया है। यह फैसला 15 साल पुराने उस मामले में आया है, जिसमें CNT एक्ट का उल्लंघन कर फर्जी पते के जरिए आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की गई थी।

सजा पर 30 अगस्त को होगी सुनवाई
कोर्ट ने सभी दोषियों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब उनकी सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है। मामले की पैरवी सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने की।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
मामले की जांच में यह साफ हुआ कि एनोस एक्का ने मंत्री रहते हुए अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया। उन्होंने फर्जी पते का इस्तेमाल कर आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री की। इस अवैध काम में तत्कालीन LRDC कार्तिक कुमार प्रभात की भी सक्रिय भूमिका थी। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर जमीन की हेराफेरी हुई।

किन-किन जगहों पर खरीदी गई जमीन
जांच के दौरान यह सामने आया कि एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी गई थी। इनमें शामिल हैं –

  • हिनू (रांची) में 22 कट्ठा जमीन
  • ओरमांझी में 12 एकड़ जमीन
  • नेवरी में 4 एकड़ जमीन
  • चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल जमीन
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ये सभी खरीदारी मार्च 2006 से मई 2008 के बीच की गई थी। इस दौरान जमीन खरीद के लिए फर्जी दस्तावेज और पते का इस्तेमाल किया गया।

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अदालत में सिद्ध हुए आरोप
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि मंत्री पद पर रहते हुए एनोस एक्का ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। उन्होंने पत्नी के नाम से जमीन खरीदी ताकि कानूनी कार्रवाई से बच सकें। लेकिन लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने सभी आरोप सही पाए और आरोपियों को दोषी करार दिया।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस फैसले के बाद झारखंड की राजनीति में एक बार फिर जमीन घोटाले का मुद्दा चर्चा में आ गया है। एनोस एक्का झारखंड की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। वहीं, प्रशासनिक पद पर रहते हुए LRDC की संलिप्तता इस मामले को और गंभीर बनाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में भी नेताओं और अधिकारियों के लिए सबक होगा कि पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री करने वालों पर कानून का शिकंजा कस सकता है।

CNT एक्ट का महत्व
झारखंड का CNT एक्ट (Chotanagpur Tenancy Act, 1908) आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। इस एक्ट के अनुसार गैर-आदिवासी व्यक्ति आदिवासी की जमीन नहीं खरीद सकता। लेकिन वर्षों से इस एक्ट का उल्लंघन कर जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री होती रही है। एनोस एक्का का मामला इसी तरह के घोटालों की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।

आगे क्या?
अब 30 अगस्त को सजा पर सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में दोषियों को कठोर सजा हो सकती है क्योंकि आरोप गंभीर हैं और अदालत में सिद्ध भी हो चुके हैं।

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