JPSC 14वीं परीक्षा में कथित धांधली का ‘सॉफ्टवेयर कनेक्शन’, यूपी परीक्षा की तर्ज पर साजिश का दावा
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। सीआईडी की एसआईटी की पूछताछ में टीडीपीएल के लिए काम करने वाले हेमंत वर्मा ने कथित तौर पर बताया है कि परीक्षा में गड़बड़ी की पूरी साजिश उत्तर प्रदेश विधान परिषद की परीक्षा में हुई कथित अनियमितता की तर्ज पर रची गई थी। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, JPSC परीक्षा के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की योजना बनाई गई थी। इस सॉफ्टवेयर को तैयार करने की जिम्मेदारी पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों को दिए जाने की बात सामने आई है।
यूपी विधान परिषद परीक्षा के लिए भी बनाया था सॉफ्टवेयर
हेमंत वर्मा पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वर्ष 2020 में टीडीपीएल कंपनी के कहने पर उनकी कंपनी ने यूपी विधान परिषद आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए पोर्टल और सॉफ्टवेयर तैयार किया था। यही सॉफ्टवेयर कनेक्शन अब JPSC 14वीं परीक्षा की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीआईडी की पूछताछ में सामने आए दावे के अनुसार, यूपी विधान परिषद परीक्षा के लिए तैयार किए गए सिस्टम की तर्ज पर ही झारखंड में होने वाली JPSC परीक्षा के लिए भी सॉफ्टवेयर विकसित कराने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, पूछताछ में सामने आए इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
2025 में टीडीपीएल ने फिर किया संपर्क
जांच के अनुसार, वर्ष 2025 में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह को JPSC परीक्षा संचालन का काम मिलने के बाद उन्होंने लखनऊ में हेमंत वर्मा से संपर्क किया। बताया गया है कि इसी दौरान JPSC परीक्षा की तकनीकी व्यवस्था और सॉफ्टवेयर से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। सीआईडी के सामने दिए गए कथित बयान के अनुसार, टीडीपीएल की ओर से पिकर टेक्नोलॉजी को JPSC परीक्षाओं के लिए भी उसी तरह का सॉफ्टवेयर तैयार करने को कहा गया, जैसा सॉफ्टवेयर पहले यूपी विधान परिषद की आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए तैयार किया गया था। यह जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसी अब कथित सॉफ्टवेयर नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
लखनऊ में हुई बैठक में बनी थी योजना?
हेमंत वर्मा के कथित बयान के मुताबिक, टीडीपीएल के अधिकारियों और पिकर टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों के बीच लखनऊ स्थित कार्यालय में बैठक हुई थी। इसी बैठक में JPSC परीक्षाओं के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने को लेकर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि मो. उस्मान भी पिकर टेक्नोलॉजी के लिए काम करता था। अब एसआईटी कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन से जुड़े तकनीकी काम में किन-किन लोगों की भूमिका थी और सॉफ्टवेयर तैयार करने के दौरान किन निर्देशों का पालन किया गया।
सॉफ्टवेयर की भूमिका जांच के केंद्र में
JPSC 14वीं परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के दौरान सॉफ्टवेयर का पहलू सामने आने के बाद अब सीआईडी इस बात की जांच कर सकती है कि प्रस्तावित या इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर में ऐसी कौन-सी तकनीकी व्यवस्था थी, जिसका कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने में इस्तेमाल किया जा सकता था। जांच एजेंसी के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा से पहले सॉफ्टवेयर को किसने तैयार कराया, उसके तकनीकी नियंत्रण की जिम्मेदारी किसके पास थी और परीक्षा संचालन के दौरान सिस्टम तक किस-किस व्यक्ति की पहुंच थी। इसके अलावा जांच में टीडीपीएल, पिकर टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े लोगों के बीच हुए संपर्क, बैठक, भुगतान और अन्य तकनीकी दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है।
यूपी से झारखंड तक जुड़ रही कड़ियां
JPSC 14वीं परीक्षा की कथित अनियमितता की जांच अब सिर्फ परीक्षा केंद्रों या अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसी तकनीकी व्यवस्था और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों के नेटवर्क को भी खंगाल रही है। यूपी विधान परिषद आरओ/एआरओ परीक्षा के लिए बनाए गए सॉफ्टवेयर और JPSC परीक्षा के लिए प्रस्तावित सॉफ्टवेयर के बीच कथित समानता की जांच भी अहम हो सकती है। फिलहाल सीआईडी की एसआईटी पूछताछ, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। हेमंत वर्मा के कथित बयान से सामने आया सॉफ्टवेयर कनेक्शन JPSC 14वीं परीक्षा की जांच में एक नया पहलू जोड़ता है। हालांकि, आरोपों और बयानों की वास्तविकता जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।





