77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में बोले हेमंत सोरेन: जल, जंगल और जमीन बचेंगे तभी समृद्ध होगा झारखंड
मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन ने किया वृक्षारोपण, 20 वन मित्रों को किया सम्मानित; 58 नहीं, 3 नए वन विभागीय वाहनों को दिखाई हरी झंडी

रांची: 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी धर्मपत्नी एवं विधायक कल्पना सोरेन ने शुक्रवार को रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान दोनों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण ही समृद्ध, संतुलित और सुरक्षित झारखंड की आधारशिला है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। साथ ही वन विभाग के 3 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जलवायु परिवर्तन दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती : हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौती बन चुका है। इसका असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधन, जैव विविधता और वन्यजीवों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि अनियोजित विकास, अंधाधुंध खनन, औद्योगीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरणीय असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


‘हर नागरिक एक पौधा लगाए, उसकी जिम्मेदारी भी निभाए’
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक कम-से-कम एक पौधा जरूर लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प भी ले। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में वृक्षारोपण अभियानों की समीक्षा स्वयं करेगी और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों एवं संस्थाओं को सम्मानित भी करेगी।
प्रकृति के साथ सामंजस्य ही सतत विकास का रास्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य में विकास की योजनाएं प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक जनभागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा।
मानव ही नहीं, वन्यजीव भी झेल रहे जलवायु परिवर्तन का असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम के कारण अनियमित वर्षा, अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर किसानों, ग्रामीणों और आम नागरिकों के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जंगलों के लगातार सिकुड़ने से वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत है।


स्थानीय और उपयोगी प्रजातियों के पौधों पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता देगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, पशु-पक्षियों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। वृक्षारोपण योजनाओं में स्थानीय जलवायु, मिट्टी और पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

असम की बाढ़ का किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने असम समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आई बाढ़ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वन्यजीवों, जैव विविधता और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

20 वन मित्रों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों और समिति प्रतिनिधियों को वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक वन प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और इनके प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल रही है।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विश्वनाथ शाह, ए.टी. मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वेंकटेश लू, जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एस.आर. नेटेशा सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






