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रंका के धेंगुरा जंगल में तीन पशु गायब, बाघ के पदचिह्न मिलने का दावा; वन विभाग का सर्च अभियान जारी

Wildlife News

रंका : रंका अनुमंडल के विश्रामपुर पंचायत अंतर्गत धेंगुरा गांव से सटे जंगल में लगातार तीन पशुओं के गायब होने और दो बकरियों के अवशेष मिलने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बछड़े की तलाश के दौरान ग्रामीणों ने जंगल में बड़े जानवर के पंजे जैसे निशान मिलने का दावा किया है। इसके बाद इलाके में बाघ के विचरण की आशंका को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, अब तक वन विभाग की ओर से क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वन विभाग की टीम सूचना के आधार पर इलाके में सर्च अभियान चला रही है। पदचिह्नों और पशुओं के अवशेषों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाके में बाघ या कोई अन्य बड़ा शिकारी जंगली जानवर मौजूद है।

दो बकरियां गायब, जंगल में मिले अवशेष
पीड़ित परिवार के नरेश यादव और रामलाल यादव के मुताबिक, दो दिन पहले उनकी दो बकरियां जंगल में चरने के दौरान गायब हो गई थीं। काफी तलाश के बाद भी जब बकरियों का पता नहीं चला तो परिजनों और ग्रामीणों ने आसपास के जंगल में खोजबीन शुरू की।
तलाश के दौरान ग्रामीणों को बकरियों के केवल हड्डियां और अवशेष मिले। इसके बाद आशंका जताई गई कि किसी जंगली जानवर ने बकरियों का शिकार किया होगा। इसी बीच 4 सितंबर को नरेश यादव का करीब तीन वर्ष का बछड़ा भी गायब हो गया। बछड़े के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने जंगल और आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। लगातार तीन पशुओं के गायब होने और बकरियों के अवशेष मिलने से ग्रामीणों को इलाके में किसी बड़े शिकारी जंगली जानवर की मौजूदगी का संदेह होने लगा।

पंजों के निशान से बाघ की आशंका
बछड़े की तलाश के दौरान ग्रामीणों ने जंगल में बड़े जानवर के पंजे जैसे निशान देखे। ग्रामीणों का दावा है कि ये निशान सामान्य जंगली जानवरों के पदचिह्नों से अलग दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर इलाके में बाघ के होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन वर्ष का बछड़ा आकार में बड़ा होता है, इसलिए किसी बड़े शिकारी जानवर द्वारा उसके शिकार किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, केवल ग्रामीणों द्वारा देखे गए पदचिह्नों के आधार पर बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की जा सकती। पदचिह्नों की विशेषज्ञ जांच और वन विभाग की निगरानी के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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वन विभाग ने शुरू किया सर्च अभियान
मामले को लेकर जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ईबिन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और बलीगढ़ क्षेत्र से भी आम लोगों की ओर से बाघ देखे जाने की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इन सूचनाओं के आधार पर वन विभाग की टीम लगातार संबंधित इलाकों में सर्च अभियान चला रही है। वन विभाग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी है या किसी अन्य जंगली जानवर के कारण पशुओं के गायब होने की घटनाएं हुई हैं।

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उप मुखिया ने बढ़ाई निगरानी की मांग
विश्रामपुर पंचायत के उप मुखिया प्रमोद गुप्ता ने धेंगुरा जंगल में मिले कथित पदचिह्नों को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से विशेष सतर्कता बरतने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में वास्तव में बाघ या कोई अन्य बड़ा शिकारी जानवर मौजूद है तो ग्रामीणों और उनके पशुओं की सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने जंगल से सटे इलाकों में निगरानी और गश्त बढ़ाने की मांग की है। वहीं पंचायत के समाजसेवी विवेक कुमार सिंह उर्फ छोटू कुमार सिंह ने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जंगल से सटे गांवों के लोगों की आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में बड़े जंगली जानवर की मौजूदगी की आशंका से ग्रामीणों में भय होना स्वाभाविक है।

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पलामू टाइगर रिजर्व से जानवर के आने की चर्चा
ग्रामीणों का कहना है कि धेंगुरा का जंगल आसपास के बड़े वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। लातेहार जिले के बेतला क्षेत्र और पलामू टाइगर रिजर्व से जंगली जानवरों के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में आने की संभावना से भी ग्रामीण इनकार नहीं कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर दूसरे वन क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में किसी बाघ के पहुंचने की बात फिलहाल सिर्फ आशंका और स्थानीय दावों तक सीमित है।

कैमरा ट्रैप और वैज्ञानिक जांच से खुलेगा राज
वन्यजीव विशेषज्ञों के स्तर पर पदचिह्नों की पहचान, पशुओं के अवशेषों की जांच और आवश्यकता पड़ने पर कैमरा ट्रैप के जरिए निगरानी की जा सकती है। इन माध्यमों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आखिर पशुओं के गायब होने के पीछे कौन सा जंगली जानवर जिम्मेदार है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगल के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने, कथित पदचिह्नों की वैज्ञानिक जांच कराने और लोगों को आवश्यक सावधानियों की जानकारी देने की मांग की है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, ग्रामीणों को जंगल में अकेले जाने से बचने और मवेशियों को जंगल के अंदर चरने के लिए अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी जा रही है।

तीन पशुओं के गायब होने से ग्रामीणों में दहशत
फिलहाल धेंगुरा जंगल में दो बकरियों के अवशेष मिलने, एक बछड़े के गायब होने और बड़े जानवर के पंजे जैसे निशान मिलने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग का सर्च अभियान जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के दौरान मिले पदचिह्न और अन्य साक्ष्यों से क्या सामने आता है। जब तक वन विभाग बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं करता, तब तक इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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