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झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी, 5 हजार सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बनाने पर जोर

Jharkhand School of Excellence

रांची: हेमंत सोरेन ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत एवं आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा विजन सामने रखा है। झारखंड मंत्रालय में आयोजित स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार की सभी शैक्षणिक योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और 2026-27 की कार्य योजना की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगातार सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना मजबूत कर रही है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधन, इंटरनेट सुविधा, आईसीटी लैब, पुस्तकालय, पेयजल, शौचालय और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों में परीक्षा परिणाम कमजोर रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर विशेष निगरानी और सुधार योजना लागू की जाए।

“शिक्षा ही राज्य की असली ताकत”
बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि किसी भी राज्य की असली ताकत उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है। यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, तभी राज्य का भविष्य मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के बच्चे प्रतिभाशाली हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें सही संसाधन, मार्गदर्शन और अवसर देने की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

5 हजार सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बनाने का लक्ष्य
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु राज्य में CM School of Excellence की संख्या बढ़ाकर 5 हजार करने की योजना रही। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को तेज गति से आगे बढ़ाया जाए ताकि प्रत्येक पंचायत स्तर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य के हर क्षेत्र में ऐसे मॉडल स्कूल विकसित किए जाएं, जहां आधुनिक शिक्षा, डिजिटल संसाधन और बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है।

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सिंगल टीचर स्कूल खत्म करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अगले 6 से 8 महीनों के भीतर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य का कोई भी विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर योग्य युवाओं और छात्राओं को विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से शिक्षण कार्य में जोड़ा जा सकता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।

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हजारों शिक्षकों की नियुक्ति, और बहाली होगी तेज
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति की गई है और यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नव नियुक्त शिक्षकों के सभी सत्यापन कार्य शीघ्र पूरे किए जाएं, ताकि उन्हें समय पर वेतन मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।

ड्रॉप आउट मामलों में झारखंड की बेहतर स्थिति
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि राज्य में ड्रॉप आउट मामलों में लगातार सुधार हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार झारखंड इस मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। सरकार स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चला रही है। श्रम विभाग के साथ समन्वय कर ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है जो मजदूरी या अन्य कार्यों के कारण शिक्षा से दूर हो गए हैं।

डिजिटल शिक्षा और इंटरनेट सुविधा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने और आईसीटी लैब को सक्रिय एवं कार्यशील बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को तकनीकी संसाधनों से जोड़ना आवश्यक है। सरकार का प्रयास है कि राज्य के बच्चे आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ें।

खेल और शिक्षा का संतुलित विकास
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्कूलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएं। अधिकारियों ने बताया कि विद्यालयों में स्पोर्ट्स किट वितरित किए जा रहे हैं और राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिताओं में झारखंड के बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है, इसलिए खेल प्रतिभाओं को और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों पर फोकस
बैठक में राज्य के नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में ऐसे 26 विद्यालय संचालित हैं, जहां लगभग 4 हजार वंचित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इन विद्यालयों में बेहतर रखरखाव, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय होगा विशेष मॉडल
बैठक में प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि रांची के जगुआर कैंपस में विद्यालय निर्माण के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। यह विद्यालय शहीद पुलिसकर्मियों के बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

परिवहन और हरित परिसर पर भी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्कूल परिवहन सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया, ताकि बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी विद्यालय परिसरों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।

हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई यह समीक्षा बैठक केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की व्यापक रणनीति के रूप में देखी जा रही है। सरकार का फोकस स्पष्ट है—ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना, आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना, शिक्षक नियुक्ति तेज करना और सरकारी विद्यालयों को प्रतिस्पर्धी बनाना। अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 5 हजार सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और अन्य योजनाओं को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से लागू किया जाता है।

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