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झारखंड में नई शराब नीति लागू, विदेशी ब्रांड हुए सस्ते

Jharkhand New Liquor Policy 2025 Jharkhand New Liquor Policy 2025

कल से लागू होंगे नए रेट, विदेशी ब्रांड्स पर 6,600 रुपये तक की छूट

रांचीः झारखंड में 1 सितंबर से शराब की नई उत्पाद नीति लागू हो रही है। राज्य सरकार ने दरों में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत विदेश में बनी विदेशी शराब (Foreign Made Foreign Liquor) अब 6,600 रुपये तक सस्ती हो जाएगी, वहीं भारत में बनी विदेशी शराब (IMFL) 300 रुपये तक महंगी मिलेगी। इसके साथ ही बीयर और देसी शराब की कीमतों में भी 20 रुपये तक की वृद्धि की गई है।

प्रीमियम विदेशी ब्रांड्स की कीमतों में भारी गिरावट

नई दर लागू होने के बाद प्रीमियम विदेशी ब्रांड्स की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

  • रॉयल सैल्यूट – पहले 20,000 रुपये की बोतल अब 13,400 रुपये में उपलब्ध होगी यानी 6,600 रुपये की राहत।
  • रॉयल ब्रासक्ला सिंगल मॉल्ट – 17,500 रुपये से घटकर 11,900 रुपये।
  • ग्लेनलिवे – 5,400 रुपये से घटकर 4,100 रुपये।
  • चिवास रीगल और ब्लैक लेबल – 900 रुपये तक सस्ते।
  • वाइन ब्रांड जेकब्स क्रीक – 1,650 रुपये की जगह अब 1,250 रुपये में मिलेगी।
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इन दरों में कटौती से प्रीमियम शराब पसंद करने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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भारत निर्मित विदेशी शराब महंगी

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नई नीति लागू होने के बाद भारत में बनी विदेशी शराब (IMFL) के दाम बढ़ गए हैं।

  • ऑफिसर्स च्वाइस व रॉयल स्टैग – 670 रुपये से बढ़कर 780 रुपये।
  • ब्लैक डॉग, 100 पाइपर्स, विलियम लॉसन – 200–250 रुपये तक महंगे।
  • बकार्डी और गोल्फर शॉट – 100 रुपये तक महंगे।
  • एंटीक्विटी ब्लू और ब्लेंडर्स प्राइड – 150 रुपये महंगे।
  • हालांकि, ओल्ड मोंक गोल्ड रिजर्व 780 से घटकर 675 रुपये में उपलब्ध होगी।
  • बीयर और देसी शराब के रेट में वृद्धि

बीयर और देसी शराब के दाम में भी बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के अनुसार इनकी कीमतों में औसतन 20 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार को होगी अतिरिक्त आमदनी
विशेषज्ञों का मानना है कि नई उत्पाद नीति से राज्य सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी होगी। सस्ती विदेशी शराब से बिक्री में वृद्धि की संभावना है, जबकि IMFL और देसी शराब के बढ़े दाम से टैक्स संग्रह बढ़ेगा।

उपभोक्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
नई नीति पर उपभोक्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। प्रीमियम ब्रांड्स खरीदने वाले ग्राहकों ने इसे राहत भरा कदम बताया है, वहीं मध्यम वर्गीय उपभोक्ता भारत में बनी विदेशी शराब और बीयर के बढ़े दाम से नाखुश नजर आ रहे हैं।

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