रांची में SSC GD मेडिकल टेस्ट के नाम पर 1.60 लाख की ठगी, पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़ किया; एक गिरफ्तार, सरगना फरार
रांची: रांची में एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा के मेडिकल परीक्षण को “पास” कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर चल रही ठगी का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई नगड़ी थाना क्षेत्र में स्थित सीआरपीएफ कैंप से नजदीकी समन्वय के बाद की गई। गिरफ्तार आरोपी गिरोह का सहयोगी बताया जा रहा है, जबकि मुख्य सरगना आशीष दिग्विजय कुमार अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह गिरोह मेडिकल टेस्ट में कमियों को सुधारने और फिटनेस रिपोर्ट “फिक्स” कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था।
शिकायत के बाद खुली धोखाधड़ी की साज़िश
गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र निवासी मुन्ना कुमार (20 वर्ष) ने इस मामले की लिखित शिकायत नगड़ी थाना में दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, वह 13 नवंबर को सेम्बो स्थित सीआरपीएफ कैंप में SSC GD का मेडिकल टेस्ट देने आया था। 16 नवंबर को उसका री-मेडिकल भी हुआ।
कैंप से बाहर निकलने के दौरान एक युवक ने खुद को “मेडिकल पास कराने वाला एजेंट” बताते हुए उससे संपर्क किया। युवक ने अपना नाम “आशीष” बताया और दावा किया कि वह मेडिकल रिपोर्ट को “फिट” कराने में सक्षम है। आशीष ने इसके बदले 1.60 लाख रुपये की मांग की और भरोसा जताया कि पैसे देने पर उसके सभी दस्तावेज सही करवा दिए जाएंगे। उसने गारंटी के तौर पर अभ्यर्थी के दस्तावेज भी अपने पास रख लिए।
मुन्ना को जल्द ही ठगी का एहसास हुआ और उसने तुरंत सीआरपीएफ जवानों को पूरी बात बता दी।
जाल बिछाया गया, आरोपी खुद फँस गया
25 नवंबर की रात करीब 10 बजे आशीष ने मुन्ना को दलादली चौक के पास बुलाया और कहा कि वह खुद रांची में नहीं है, लेकिन उसका आदमी दस्तावेज देने आ रहा है। साथ ही उसने 70 हजार रुपये एक फोन-पे नंबर पर भेजने के लिए कहा। मुन्ना ने गड़बड़ी की पुष्टि करने के लिए 10 रुपये का ट्रायल पेमेंट भी किया।
इस बीच सीआरपीएफ ने मुन्ना की सूचना पर कार्रवाई की रणनीति बना ली थी। जैसे ही एक युवक पल्सर बाइक (JH 01 DL 9630) से दस्तावेज देने पहुंचा, घात लगाए जवानों ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
एक आरोपी गिरफ्तार, खुलासा—गिरोह राज्य से बाहर तक फैला
गिरफ्तार युवक की पहचान अजय कुमार ठाकुर (निवासी—कुम्हरडीहा, बड़का गांव, हजारीबाग और वर्तमान पता—सिमलिया, रातू, रांची) के रूप में हुई। अजय स्वीकार करता है कि वह आशीष के लिए “डिलीवरी बॉय” का काम करता था और पैसे तथा दस्तावेज लेने-देने के काम में शामिल था।
नगड़ी थाना में कांड संख्या 191/25 दर्ज करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी आशीष दिग्विजय कुमार और उसके सहयोगी अजय के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि यह गिरोह बिहार, झारखंड और आसपास के राज्यों में इसी तरह SSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने में सक्रिय रहा है।
कैसे करता था गिरोह अभ्यर्थियों को शिकार?
जांच में सामने आया है कि ये एजेंट खासतौर पर मेडिकल टेस्ट के दौरान या बाद में अभ्यर्थियों को निशाना बनाते थे।
वे खुद को भर्ती विभाग से जुड़ा व्यक्ति बताकर अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाते थे कि—
- मेडिकल रिपोर्ट में सुधार करवाया जा सकता है
- अयोग्य अभ्यर्थियों को “फिट” करवाया जा सकता है
- दस्तावेज और फिटनेस मूल्यांकन “अंदर से” पास करवाया जा सकता है
मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर और डरे हुए अभ्यर्थी उनकी बातों में आकर मोटी रकम देने के लिए तैयार हो जाते थे।
मुख्य सरगना की तलाश तेज
नगड़ी थाना प्रभारी और जांच टीम मुख्य आरोपी आशीष दिग्विजय कुमार के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि—
- गिरोह का नेटवर्क कई जिलों में फैला है
- डिजिटल पेमेंट की जानकारी निकाली जा रही है
- बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर, लोकेशन डेटा ट्रेस किया जा रहा है
- जल्द ही मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी संभव है
पुलिस ने अभ्यर्थियों को चेताया—ऐसे एजेंटों से सावधान रहे
पुलिस ने सलाह दी है कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कोई भी काम केवल आधिकारिक पोर्टल और दस्तावेजों के माध्यम से ही किया जाए।
नगड़ी थाना पुलिस ने कहा—
“SSC या किसी भी सरकारी भर्ती में किसी भी तरह का शॉर्टकट संभव नहीं है। ऐसे लोगों के जाल में फंसना अपने करियर और पैसे दोनों को जोखिम में डालना है।”








