रांची में 5वीं की छात्रा का अपहरण, रामगढ़ के कुजू में मिली | वैन सवार अपराधियों ने ओवरब्रिज से किया अगवा, फायरिंग से मचा हड़कंप

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रांची से अगवा बच्ची रामगढ़ में बरामद | दिनदहाड़े हुई अपहरण की घटना ने कानून-व्यवस्था की पोल खोली, गाड़ी नंबर JH01FU6874 रेडार पर

रांची, झारखंड 30 जुलाई 2025: राजधानी रांची की सड़कों पर आज सुबह जो हुआ, उसने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि झारखंड में बच्चों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है? डोरंडा ओवरब्रिज के पास एक स्कूली बच्ची को तीन बदमाशों ने उस वक्त अगवा कर लिया, जब वह रोज की तरह स्कूल जा रही थी। सुबह 7 बजे के आसपास घटी यह घटना न सिर्फ सनसनीखेज थी, बल्कि इसमें बदमाशों की हिम्मत देख हर कोई स्तब्ध है—उन्होंने हवा में फायरिंग की, बच्ची को जबरन सफेद वैन में डाला और फरार हो गए।

कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि अपहरणकर्ताओं ने बच्ची को रामगढ़ जिले के कुजू इलाके में छोड़ दिया। बच्ची फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन जो मानसिक आघात उसने सहा है, उसकी भरपाई कौन करेगा? और क्या यह अपहरण अचानक था, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है? पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है।

चाचा की आंखों के सामने घटी वारदात, लेकिन कुछ न कर सके
बच्ची के चाचा, जो उसके साथ मौजूद थे, कुछ समझ पाते उससे पहले तीनों बदमाश झपट पड़े। उन्होंने साफ कहा, “हमारी आंखों के सामने ही बच्ची को उठा लिया गया। डर इतना था कि आवाज भी नहीं निकल पाई, और जब तक हम कुछ कर पाते, वैन फरार हो चुकी थी।”घटना के बाद पूरे डोरंडा और चुटिया इलाके में दहशत का माहौल फैल गया। माता-पिता स्कूलों से बच्चों को बीच में ही वापस बुलाने लगे।

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वैन नंबर JH01FU6874 पुलिस के रडार पर, पूरे झारखंड में अलर्ट
जिस वैन में बच्ची को उठाया गया, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर JH01FU6874 पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से मिला है। यह नंबर अब पूरे झारखंड में पुलिस रेडार पर है। सभी थानों को अलर्ट जारी कर दिया गया है, ताकि वैन और उसके मालिक की पहचान कर तुरंत गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके।

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तकनीकी निगरानी से अपराधियों पर बढ़ा दबाव?
पुलिस सूत्रों की मानें तो जैसे ही मामला सामने आया, साइबर सेल, सीसीटीवी एनालिसिस टीम और मोबाइल ट्रैकिंग यूनिट को एक्टिव किया गया। इसी दबाव के कारण अपहरणकर्ता बच्ची को बीच रास्ते में छोड़ भागे।
रामगढ़ के कुजू इलाके में जब बच्ची को छोड़ा गया, तब उसने स्थानीय लोगों की मदद से अपने पिता को फोन किया, जिसके बाद उसे सुरक्षित परिजनों को सौंपा गया।

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पुलिस अब भी चुप, लेकिन जांच जारी
डोरंडा थाना के अधिकारी फिलहाल मीडिया से बात करने से बच रहे हैं। हालांकि, चुटिया थाना की ओर से अपहरण की पुष्टि कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि बच्ची से पूछताछ कर घटनाक्रम को जोड़ा जा रहा है और जल्द ही अपराधियों तक पहुंचने की बात कही जा रही है।

बच्ची की बहादुरी ने बचाई जान
अपनी उम्र से कहीं ज्यादा हिम्मत दिखाते हुए बच्ची ने जब खुद को कुजू में अकेला पाया, तो स्थानीय दुकानदारों से मदद ली, उन्हें अपने पिता का नंबर दिया और स्थिति समझाई। यह उसकी सूझबूझ और साहस ही था कि वह खुद को सही सलामत स्थिति तक पहुंचा पाई।

स्कूल प्रबंधन और सुरक्षा पर लगे सवाल
यह घटना तब घटी, जब बच्ची स्कूल के रास्ते में थी—मतलब यह साफ है कि बदमाशों ने पहले से रैकी की थी। अब सवाल यह है कि क्या स्कूल प्रशासन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं कर पा रहे?क्या आने वाले समय में हर माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने खुद जाना पड़ेगा?

लोगों की मांग – जल्द हों गिरफ्तारियां, और हो कानून में सख्ती
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। “अगर बच्ची को समय पर नहीं छोड़ा जाता, तो न जाने क्या होता,” – एक बुजुर्ग ने कहा, जिनकी दुकान पर बच्ची मदद के लिए पहुँची थी।

रांची जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह दिनदहाड़े बच्ची का अपहरण, फिर गोली चलाना, और कुजू जैसे दूसरे जिले में जाकर छोड़ देना — यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।पुलिस को अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, कार्रवाई करनी होगी। यह वक्त है उस सड़ते हुए सिस्टम को झकझोरने का — ताकि अगली बच्ची अगवा न हो, अगला चाचा अपने हाथ मलते न रह जाए।

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