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झारखंड में ‘ओला-उबर’ जैसी 108 एंबुलेंस सेवा, अब मिनटों में पहुंचेगी मदद

Jharkhand ambulance service

रियल-टाइम ट्रैकिंग, हाइपरलोकल डिस्पैच और ऑटोमेटेड सिस्टम से घटेगा रिस्पॉन्स टाइम

रांची : झारखंड में लंबे समय से अस्त-व्यस्त और धीमी एंबुलेंस सेवा को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाया जाएगा, जो ओला-उबर की तरह काम करेगी। इस नई व्यवस्था के तहत एंबुलेंस सेवा को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक एकीकृत तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। इसके लिए नया आरएफपी (Request for Proposal) तैयार किया गया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
नई प्रणाली के तहत राज्य में एक सेंट्रल कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा, जहां से पूरे राज्य की एंबुलेंस सेवा की निगरानी की जाएगी। इस सेंटर से हर एंबुलेंस की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग होगी और जरूरत के अनुसार सबसे नजदीकी एंबुलेंस को तुरंत भेजा जाएगा। यह सिस्टम “हाइपरलोकल डिस्पैच” मॉडल पर काम करेगा, यानी मरीज के सबसे नजदीक मौजूद एंबुलेंस को प्राथमिकता दी जाएगी—ठीक वैसे ही जैसे ओला और उबर में कैब बुक होती है।

ऑटोमेटेड और स्मार्ट प्लेटफॉर्म
नई एंबुलेंस सेवा पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी, जिसमें एल्गोरिदम के जरिए एंबुलेंस की तैनाती और मूवमेंट तय होगा। राज्य को छोटे-छोटे ज़ोन में बांटा जाएगा ताकि हर क्षेत्र में सेवा बेहतर और तेज मिल सके। साथ ही, सरकार के पास एक लाइव डैशबोर्ड होगा, जिससे हर कॉल और हर एंबुलेंस की गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी।

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टेंडर प्रक्रिया और शर्तें
इस सेवा को लागू करने के लिए टेंडर दो स्तरों पर होगा—तकनीकी योग्यता और वित्तीय बोली। जो एजेंसी सबसे कम बोली लगाएगी (LCS मॉडल), उसे यह जिम्मेदारी दी जाएगी। चयनित एजेंसी को 50 लाख रुपये की अग्रधन राशि जमा करनी होगी। टेंडर प्रक्रिया GeM पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी और सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए 7 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद 5 वर्षों तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उसी एजेंसी की होगी।

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वर्तमान व्यवस्था और बदलाव
अभी झारखंड में 24 जिलों में कुल 543 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिनमें बेसिक और एडवांस लाइफ सपोर्ट दोनों तरह की सेवाएं शामिल हैं। नई व्यवस्था में इन सभी एंबुलेंस को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण, शहरी और दूर-दराज के इलाकों में भी बेहतर सेवा मिल सकेगी।

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पारदर्शिता और नियंत्रण
इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहेगा। ओला-उबर की तरह इसमें किराया तय नहीं होगा, बल्कि सेवा पूरी तरह मुफ्त या सरकारी नियमों के अनुसार होगी। हर कॉल और एंबुलेंस मूवमेंट का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे भविष्य में जांच और मॉनिटरिंग आसान होगी।

क्या बदलेगा?
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। इसके अलावा, सेवा में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। झारखंड सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अगर यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो राज्य के लाखों लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बड़ी राहत मिलेगी।

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