आज से शुरू हुआ झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र
8 दिसंबर को पेश होगा 11 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट, सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
रांची: झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज यानी 5 दिसंबर से प्रारंभ हो गया है। वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल पांच कार्य दिवसों तक चलने वाला यह सत्र 11 दिसंबर को समाप्त होगा। सत्र शुरू होने के साथ ही कई विधायी मुद्दे, प्रशासनिक प्रश्न, सरकारी योजनाओं की समीक्षा और विपक्ष–सत्ता पक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहसों की संभावना जताई जा रही है।
इस सत्र का सबसे अहम बिंदु वित्त वर्ष 2025–26 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट होगा। सरकार की ओर से यह बजट 8 दिसंबर को सदन में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस अनुपूरक बजट का कुल आकार 11,000 करोड़ रुपये होगा, जिसमें राज्य की चल रही योजनाओं, विकास परियोजनाओं और विभिन्न विभागीय आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त आवंटन का प्रस्ताव रखा जाएगा।
सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक—सदन को सुचारू चलाने पर जोर
विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सत्र शुरू होने से एक दिन पहले गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विपक्ष के नेता व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर और अन्य प्रमुख दलों के विधायकों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान अध्यक्ष ने कहा कि यह सत्र केवल पांच दिनों का है और इसलिए सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा है ताकि महत्वपूर्ण विधायी कार्य सुचारू रूप से पूरे किए जा सकें। उन्होंने कहा कि सदन लोकतंत्र का मंदिर है और सभी पक्षों को इसमें अनुशासित भूमिका निभानी चाहिए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी ओर से आश्वस्त किया कि सरकार सत्र के दौरान विपक्ष के सभी प्रश्नों और मुद्दों पर जवाब देने को तैयार है। वहीं, विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उनकी पार्टी जनहित से जुड़ी समस्याओं को मजबूती से सदन में उठाएगी।
5 दिवसीय सत्र में कई अहम मुद्दों पर टकराव की संभावना
शीतकालीन सत्र के दौरान कई मुद्दों पर जोरदार चर्चा होने की उम्मीद है। ओबीसी आरक्षण, स्थानीय नीति, बेरोजगारी, राज्य में भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों, कानून–व्यवस्था की स्थिति, और विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति जैसे विषय विपक्ष के निशाने पर रह सकते हैं।
वहीं, सरकार अनुपूरक बजट के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास करेगी कि विकास कार्य बिना बाधा के आगे बढ़ रहे हैं और राज्य की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है। 5 दिवसीय सत्र में प्रश्नकाल, शून्यकाल और अल्पकालिक चर्चा के दौरान कई राजनीतिक मुद्दे तीखे रूप में सामने आ सकते हैं।
अनुपूरक बजट: किन क्षेत्रों को मिल सकता है अतिरिक्त आवंटन?
यद्यपि अनुपूरक बजट का विस्तृत स्वरूप 8 दिसंबर को स्पष्ट होगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार कई विभागीय योजनाओं में खर्च की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए यह अनुपूरक बजट ला रही है। माना जा रहा है कि इससे वर्ष 2025–26 के मुख्य बजट की तैयारी के लिए भी आधार तैयार होगा।
सदन में सत्ता–विपक्ष के बीच टकराव के संकेत भी स्पष्ट
हाल के महीनों में राज्य की राजनीति में जिस तरह तनाव बढ़ा है, उससे यह साफ है कि शीतकालीन सत्र बेहद गरम रहने वाला है। ED और केंद्र–राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। वहीं, सरकार इस सत्र को विकासात्मक एजेंडा और प्रशासनिक सुधारों को पेश करने के अवसर के रूप में देख रही है।
विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने स्पष्ट कहा है कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए, ना कि बाधा उत्पन्न करने वाली राजनीति।
छोटा सत्र, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण—राजनीतिक और वित्तीय दोनों नजरिए से अहम
झारखंड विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र भले ही केवल पाँच दिनों का है, लेकिन यह राज्य की नीति–निर्धारण प्रक्रिया के लिए निर्णायक साबित होगा। 11,000 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट के अलावा, सदन में आने वाले मुद्दे राज्य की आगामी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक तौर पर भी यह सत्र बेहद संवेदनशील समय में हो रहा है, जब राज्य सरकार और विपक्ष आमने–सामने हैं और हर मुद्दा बड़े राजनीतिक संकेत देता है। अब निगाहें 8 दिसंबर पर टिकी हैं, जब सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी और उसके बाद सदन में बहस का नया दौर शुरू होगा।








