“राज्यसभा चुनाव में JMM का मास्टरस्ट्रोक! कांग्रेस को झटका, दोनों सीटों पर उतारेगा उम्मीदवार”
कांग्रेस को बिना भरोसे में लिए प्रत्याशी घोषित करने से नाराज झामुमो, सीएम हेमंत सोरेन करेंगे औपचारिक ऐलान
रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने ऐसा फैसला लिया है जिसने महागठबंधन की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि वह राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह जानकारी सामने आई है।
बैठक के बाद बाहर निकले राज्य सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, हफीजुल हसन और विधायक बैद्यनाथ राम ने स्पष्ट कहा कि झामुमो दोनों सीटों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
कांग्रेस की घोषणा से नाराज दिखी झामुमो
पार्टी नेताओं के अनुसार बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि कांग्रेस ने महागठबंधन के सहयोगी दलों को विश्वास में लिए बिना राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में प्रणव झा के नाम की घोषणा कर दी। झामुमो नेताओं का कहना है कि गठबंधन धर्म के तहत इस मुद्दे पर पहले आपसी सहमति बननी चाहिए थी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में यह भी विचार किया गया कि भाजपा को राज्यसभा की सीट हासिल करने से रोकने के लिए झामुमो को दोनों सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश करनी चाहिए। इसी रणनीति के तहत दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया गया है।
गठबंधन की राजनीति में बढ़ी हलचल
झामुमो के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब तक माना जा रहा था कि झामुमो एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगा, जबकि दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी। महागठबंधन के भीतर भी इसी फार्मूले पर चर्चा चल रही थी। कांग्रेस लगातार यह दावा कर रही थी कि इंडिया गठबंधन के तहत दूसरी सीट पर उसकी स्वाभाविक दावेदारी बनती है। इसी सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी। हालांकि, झामुमो ने उस समय भी अपने पत्ते नहीं खोले थे।
सीएम आवास पर हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित बैठक में झामुमो के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री मौजूद रहे। इनमें मंत्री हफीजुल हसन, योगेंद्र प्रसाद, दीपक बिरुआ, सुदिव्य कुमार सोनू, सांसद नलिन सोरेन, विधायक स्टीफन मरांडी, मथुरा महतो और बसंत सोरेन शामिल थे। बैठक को राज्यसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि झामुमो इस चुनाव को केवल सीट जीतने के नजरिए से नहीं बल्कि अपने राजनीतिक वर्चस्व के प्रदर्शन के रूप में भी देख रहा है।
सोरेन परिवार से हो सकता है उम्मीदवार
झामुमो की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवार के तौर पर सोरेन परिवार का ही कोई सदस्य मैदान में उतर सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजनी सोरेन के नाम को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले भी राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है। वहीं, कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बसंत सोरेन की पत्नी का नाम भी विचाराधीन हो सकता है।
हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
आंकड़ों का गणित क्या कहता है?
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए पहली प्राथमिकता के 28 वोट आवश्यक हैं। वर्तमान विधानसभा गणित के अनुसार—
- झामुमो – 34 विधायक
- कांग्रेस – 16 विधायक
- राजद – 4 विधायक
- भाकपा (माले) – 2 विधायक
यानी इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इस हिसाब से गठबंधन आसानी से दोनों सीटें जीत सकता है। हालांकि चुनाव को रोचक बनाने का काम भाजपा ने किया है। पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद भाजपा ने भी उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। इससे क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीतियों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव में बढ़ सकती है सियासी गर्मी
कांग्रेस द्वारा प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित करने और अब झामुमो द्वारा दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने के संकेत मिलने के बाद राज्यसभा चुनाव महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर खींचतान और भाजपा की सक्रियता ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अगले कदम पर टिकी है। यदि झामुमो दोनों सीटों पर उम्मीदवार घोषित करता है, तो झारखंड की राजनीति में यह महागठबंधन के भीतर सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा।






