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इस्तीफा नहीं तो बर्खास्तगी! ममता सरकार पर बड़ा एक्शन

Mamata Government Dismissed

चुनाव हारीं, इस्तीफा नहीं दिया… राज्यपाल ने कर दी छुट्टी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चुनावी हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार करने वाली ममता बनर्जी सरकार को राज्यपाल ने बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा भी भंग कर दी गई है। राज्यपाल आर एन रवि ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया। इस कदम के बाद राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।

इस्तीफा देने से इनकार के बाद बढ़ा विवाद
4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही बंगाल की राजनीति में तनाव बना हुआ था। चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। हार के बावजूद ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया था कि वे “हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें हराया गया है।” इसी बयान के बाद संवैधानिक संकट की चर्चा तेज हो गई थी।

राज्यपाल ने भंग किया मंत्रिमंडल
लोकभवन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि चुनाव परिणामों के बाद मौजूदा मंत्रिमंडल नैतिक आधार खो चुका था, लेकिन सरकार ने इस्तीफा नहीं दिया। राज्यपाल ने संवैधानिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद को पद से हटाने का फैसला लिया। इसके साथ ही विधानसभा भंग कर दी गई। यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ऐसी स्थिति बनी हो, जहां मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो और राज्यपाल को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा हो।

15 साल पुराने “ममता राज” का अंत
विधानसभा भंग होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में पिछले 15 वर्षों से चला आ रहा ममता बनर्जी का शासन समाप्त हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राज्य में पहली बार उसकी सरकार बनने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।

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बीजेपी को मिल सकता है सरकार बनाने का न्योता
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल अब सबसे बड़े दल भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का न्योता भेज सकते हैं। भाजपा विधायक दल की बैठक जल्द होने की संभावना है, जिसमें मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर फैसला लिया जा सकता है। राज्य में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां भी तेज हो गई हैं।

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इंटरनेशनल कोर्ट जाने की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी ने पहले ही संकेत दिए थे कि यदि जरूरत पड़ी तो वह इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस तक ले जाएंगी। उन्होंने चुनाव आयोग, केंद्रीय बलों और बीजेपी पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे। ममता ने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की स्थिति में भी वह इस्तीफा नहीं देंगी।

विपक्षी नेताओं का मिला समर्थन
ममता बनर्जी को विपक्षी दलों के कई बड़े नेताओं का समर्थन भी मिला। अखिलेश यादव उनसे मिलने कोलकाता पहुंचे और कहा कि “दीदी हारी नहीं हैं।” इसके अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं ने भी ममता से फोन पर बात कर एकजुटता जताई।

आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगी या फिर विपक्ष की राजनीति को मजबूत करने में जुटेंगी। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह बंगाल में सत्ता संभालने का ऐतिहासिक मौका माना जा रहा है। आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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