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विष्णुगढ़ कांड पर सियासी घमासान: झामुमो के आरोप, भाजपा का पलटवार, दोनों दल आमने-सामने

JMM VS BJP

रांची/हजारीबाग: हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में 13 वर्षीय बच्ची की नृशंस हत्या के मामले ने जहां पूरे राज्य को झकझोर दिया है, वहीं अब यह मामला राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

झामुमो ने जताया शोक, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने इस घटना को “झारखंड की आत्मा को झकझोर देने वाली” बताते हुए पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक और साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की। उनके अनुसार, यह न केवल निंदनीय है बल्कि समाज में अशांति फैलाने की साजिश भी है। झामुमो का दावा है कि जांच में सामने आए तथ्यों से भाजपा का “असली चेहरा” उजागर हुआ है और अब पार्टी को जनता से जवाब देना चाहिए।

आरोपी की राजनीतिक पहचान को लेकर विवाद
झामुमो नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस जघन्य अपराध में शामिल मुख्य आरोपी का संबंध भाजपा से रहा है। हालांकि, इस दावे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, क्योंकि भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे राजनीतिक दुष्प्रचार बताया है।

साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश
झामुमो ने कहा कि इस घटना को जानबूझकर धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की गई, ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। पार्टी ने यह भी कहा कि झारखंड की जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है और विभाजनकारी एजेंडा को स्वीकार नहीं करेगी।

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भाजपा का पलटवार: “दुष्प्रचार और राजनीतिक नौटंकी”
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने झामुमो और कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरफ्तार आरोपी भीम राम का भाजपा से कोई संबंध नहीं है और सत्ता पक्ष द्वारा भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं। साहू ने कहा कि भाजपा ने इस मामले को गंभीरता से उठाया और पार्टी के दबाव के कारण ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ और आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो पाई।

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मशाल जुलूस और झारखंड बंद वापस
भाजपा ने इस मामले में पहले 3 अप्रैल को मशाल जुलूस और 9 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया था। हालांकि, बाद में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इन कार्यक्रमों को वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

न्यायिक जांच की मांग और सवाल
भाजपा ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग उठाते हुए कहा कि कई पहलुओं की अभी भी गहराई से जांच होनी बाकी है। साहू ने कहा कि पुलिस द्वारा दी गई जानकारी पर और छानबीन की जरूरत है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के पीछे की पूरी साजिश क्या थी।

सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला
भाजपा ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में हत्या, दुष्कर्म और अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं, और सरकार इन पर नियंत्रण करने में विफल रही है।

राजनीतिक माहौल गरमाया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जहां झामुमो भाजपा पर समाज में विभाजन फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था की विफलता और सच्चाई छुपाने का आरोप लगा रही है।

जनता की नजरें अब जांच पर
इस संवेदनशील मामले में अब सभी की नजरें पुलिस जांच और संभावित न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इस घटना का राजनीतिक असर आने वाले समय में कितना व्यापक होता है।

विष्णुगढ़ की यह दर्दनाक घटना जहां एक ओर समाज में अंधविश्वास और अपराध की गंभीर समस्या को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर इस पर हो रही सियासत भी कई सवाल खड़े करती है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अहम मुद्दा यह है कि पीड़ित को न्याय मिले और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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