चाईबासा: HIV संक्रमित खून चढ़ाने पर CM हेमंत का कड़ा निर्देश, सिविल सर्जन निलंबित, बच्चों का पूरा इलाज कराएगी सरकार

Hemant Soren

गंभीर लापरवाही पर मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन, पीड़ितों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता

चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम: झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील और गंभीर लापरवाही के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित बच्चों को कथित तौर पर एचआईवी (HIV) संक्रमित खून चढ़ाए जाने की घटना पर सीएम ने तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस मामले में पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन समेत अन्य संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

पीड़ित परिवारों को ₹2-2 लाख की सहायता और मुफ्त इलाज
हेमंत सरकार ने इस मानवीय त्रासदी से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत की घोषणा की है।

  • आर्थिक सहायता: घटना से प्रभावित प्रत्येक पीड़ित परिवारको राज्य सरकार द्वारा 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। यह सहायता राशि परिवारों को उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
  • इलाज की पूरी जिम्मेदारी: राज्य सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि एचआईवी संक्रमित पाए गए सभी बच्चों का पूरा इलाज राज्य सरकार के खर्च पर कराया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और दीर्घकालिक देखभाल में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

क्या है पूरा मामला? हाईकोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
यह पूरा मामला चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा है। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से खून चढ़ाया जाता है। आरोप है कि खून चढ़ाए जाने के बाद कुछ बच्चों में से एक पर एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह गंभीर मामला सामने आया।

मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने भी इसका स्वतः संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने तुरंत चाईबासा पहुंचकर मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच टीम ने अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रक्रियाओं और संबंधित रिकॉर्ड्स की गहन पड़ताल की।

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कार्रवाई का उद्देश्य: जवाबदेही और प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सिविल सर्जन और अन्य पदाधिकारियों के निलंबन का निर्देश यह दर्शाता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह कदम न केवल लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त रुख दिखाता है, बल्कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहयोग प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी सुनिश्चित करता है।

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