रांची में कल आदिवासी एकता महाजुटान, परिसीमन के खिलाफ जुटेंगे हजारों लोग
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और CNT-SPT एक्ट समेत संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा रहेगा केंद्र में
मोरहाबादी मैदान में सुबह 11 बजे से रैली
रांची: झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर बड़ी आवाज उठने जा रही है। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार, 30 अगस्त को आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन किया जाएगा। रैली सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी। आयोजकों के मुताबिक राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए रांची पहुंचेंगे। संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। मोरहाबादी मैदान और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। जवान सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता
महाजुटान का मुख्य मुद्दा लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता है। आयोजकों का कहना है कि परिसीमन केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव राज्य में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। आयोजकों के मुताबिक वर्ष 2002-2008 की परिसीमन प्रक्रिया के दौरान झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव सामने आया था। उस समय आदिवासी संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इसका विरोध किया गया था। झारखंड की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए उस समय इस प्रस्ताव पर रोक लगाए जाने की बात आयोजक बताते हैं। अब एक बार फिर परिसीमन की चर्चा शुरू होने के बाद आदिवासी समाज में राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर चिंता बढ़ने का दावा किया जा रहा है।
CNT और SPT एक्ट का मुद्दा भी उठेगा
महाजुटान में CNT और SPT एक्ट समेत आदिवासी समाज को मिले संवैधानिक और कानूनी संरक्षणों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी आयोजकों का कहना है कि भूमि हस्तांतरण, विस्थापन, औद्योगिकीकरण और बदलती जनसांख्यिकी जैसी परिस्थितियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों को प्रभावित किया है। ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों से जुड़े फैसले लेते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
‘सिर्फ जनसंख्या को आधार न बनाया जाए’
आयोजकों की प्रमुख मांग है कि परिसीमन की प्रक्रिया में केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार नहीं बनाया जाए। इसके साथ पांचवीं अनुसूची, आदिवासी बहुल क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों, ऐतिहासिक विस्थापन और संवैधानिक संरक्षणों को भी ध्यान में रखा जाए। उनका तर्क है कि जनसंख्या में बदलाव के पीछे कई ऐतिहासिक और सामाजिक कारण रहे हैं। इसलिए केवल मौजूदा जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव करने से आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
‘अब नहीं तो कभी नहीं’ का नारा
आदिवासी एकता महाजुटान के आयोजकों ने लोगों से बड़ी संख्या में रैली में शामिल होने की अपील की है। इसके लिए ‘अब नहीं तो कभी नहीं’ का नारा दिया गया है। आयोजकों का कहना है कि महाजुटान का उद्देश्य आदिवासी समाज की एकजुटता और अपने संवैधानिक एवं राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश देना है। रैली के जरिए परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भूमि अधिकार और आदिवासी समाज को मिले कानूनी संरक्षणों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट
मोरहाबादी मैदान में संभावित बड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी अलर्ट है। मैदान और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की तैयारी है। सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था संभालने के साथ भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा। 30 अगस्त को होने वाली इस रैली पर अब सभी की नजरें हैं। परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंताओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर होने वाला यह महाजुटान झारखंड की राजनीति में भी महत्वपूर्ण संदेश देने वाला माना जा रहा है।





