J-TET 2026: 10 साल बाद बड़ा इम्तिहान, 5.60 लाख अभ्यर्थी मैदान में; परीक्षा के साथ सरकार की भी अग्निपरीक्षा
2016 के बाद 2026 में हो रही है JTET
पुरानी JTET के बाद नियुक्तियां भी विवादों में रहीं
रांची: झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए 1 नवंबर 2026 बेहद अहम दिन है। करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद राज्य में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी J-TET 2026 का आयोजन हो रहा है। राज्यभर के 986 परीक्षा केंद्रों पर करीब 5.60 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। राजधानी रांची में भी 101 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
यह परीक्षा सिर्फ अभ्यर्थियों के लिए शिक्षक पात्रता हासिल करने का मौका नहीं है, बल्कि झारखंड की परीक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी कसौटी मानी जा रही है। पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक के आरोप, नियुक्तियों में विवाद और परीक्षा प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के बीच J-TET का निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन सरकार के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस परीक्षा को लेकर विशेष अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों से अनुशासन और सहयोग के साथ परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और कदाचारमुक्त तरीके से संपन्न कराने की अपील की है।
पहली पाली में कक्षा 1 से 5, दूसरी में 6 से 8 के अभ्यर्थी
J-TET 2026 की परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है। पहली पाली में कक्षा 1 से 5 तक के लिए शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे हैं, जबकि दूसरी पाली में कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक बनने के इच्छुक उम्मीदवार शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को लेकर केंद्रों पर प्रवेश, पहचान जांच और सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। परीक्षा की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए निगरानी के इंतजाम भी किए गए हैं।
2016 के बाद 2026 में हो रही है JTET
J-TET के इतिहास पर नजर डालें तो झारखंड गठन के बाद पहली शिक्षक पात्रता परीक्षा 2012 में आयोजित हुई थी। इसके बाद दूसरी बार 2016 में परीक्षा हुई। लेकिन 2016 के बाद 2026 तक राज्य में JTET का आयोजन नहीं हो सका। यानी अभ्यर्थियों को अगली शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए करीब एक दशक तक इंतजार करना पड़ा। इस लंबे अंतराल का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ा, जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे थे और पात्रता परीक्षा के अगले अवसर का इंतजार कर रहे थे। परीक्षा में देरी का मामला बाद में न्यायिक स्तर तक भी पहुंचा। हाईकोर्ट की सख्ती और समय-सीमा में परीक्षा कराने के निर्देश के बाद प्रक्रिया में तेजी आई। परीक्षा में देरी को लेकर शिक्षा विभाग के स्तर पर भी कानूनी कार्रवाई की स्थिति बनी।
पुरानी JTET के बाद नियुक्तियां भी विवादों में रहीं
JTET का आयोजन लंबे समय तक नहीं होने के साथ-साथ पिछली शिक्षक नियुक्तियां भी कई विवादों से घिरी रहीं। वर्ष 2012 और 2016 की शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के बाद हुई नियुक्तियों में बड़ी संख्या में पद खाली रह जाने का मुद्दा सामने आया। विशेष रूप से 2016 की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति में करीब 17,752 पदों के मुकाबले लगभग 10 हजार नियुक्तियां हो पाने और 7 हजार से अधिक पद खाली रहने का दावा किया गया था। जिलावार मेरिट सूची, राज्यस्तरीय मेरिट व्यवस्था, स्थानीय नीति और विषय संयोजन जैसे मुद्दों ने नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित किया। स्थानीय नीति से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और बाद में नियुक्ति प्रक्रिया पर इसका असर पड़ा।
पारा शिक्षकों की उम्मीदें भी JTET से जुड़ीं
शिक्षक नियुक्तियों में पारा शिक्षकों यानी वर्तमान सहायक अध्यापकों के लिए आरक्षण का प्रावधान भी लंबे समय से चर्चा में रहा है। कई श्रेणियों में निर्धारित JTET योग्यता और न्यूनतम अंक हासिल करने वाले पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिल पाने के कारण आरक्षित पदों के खाली रह जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे में इस बार की JTET परीक्षा सिर्फ नए अभ्यर्थियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि लंबे समय से सरकारी शिक्षक बनने की उम्मीद लगाए बैठे सहायक अध्यापकों के लिए भी अहम मानी जा रही है।
भाषा और नियमावली को लेकर भी रहा विवाद
J-TET से जुड़ी नियमावली और शिक्षक नियुक्ति के नियमों में समय-समय पर हुए बदलावों ने भी अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ाईं। क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। भोजपुरी, मगही और अंगिका समेत विभिन्न भाषाओं को नियमों में शामिल करने या बाहर रखने को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई। जिलावार भाषा सूची और नियुक्ति में भाषा की अनिवार्यता से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध हुआ। इसके अलावा JTET नहीं होने के कारण CTET पास उम्मीदवारों और दूसरे राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों को झारखंड की नियुक्तियों में अवसर देने से जुड़े सवाल भी कानूनी बहस का हिस्सा रहे हैं।
परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड ने बढ़ाई परेशानी
दस साल बाद परीक्षा होने के बावजूद अभ्यर्थियों की परेशानी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले ही खत्म नहीं हुई। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद कई उम्मीदवारों ने विषय और शिक्षक श्रेणी में कथित गड़बड़ी की शिकायत की। कुछ अभ्यर्थियों का दावा था कि आवेदन के दौरान उन्होंने भाषा शिक्षक से जुड़ा विकल्प चुना था, लेकिन एडमिट कार्ड में सामाजिक विज्ञान दर्ज हो गया। कुछ अन्य उम्मीदवारों ने इसके उलट भी शिकायतें कीं। अभ्यर्थियों की ओर से करीब 10 से 12 हजार उम्मीदवारों के प्रभावित होने का दावा किया गया। 26 और 27 अक्टूबर को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित JAC कार्यालय पहुंचे और समस्या के समाधान की मांग की।
986 केंद्रों पर कड़ी निगरानी
J-TET को कदाचारमुक्त बनाने के लिए राज्यभर में सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम किए गए हैं। 986 परीक्षा केंद्रों पर CCTV के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू की गई है। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने पर रोक है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र की प्रिंटेड कॉपी के साथ मूल फोटो पहचान पत्र लेकर पहुंचने का निर्देश दिया गया है। जैक अध्यक्ष डॉ. नटवा हांसदा ने भी अभ्यर्थियों से परीक्षा संबंधी सभी निर्देशों का पालन करने की अपील की है और कदाचारमुक्त परीक्षा कराने की प्रतिबद्धता जताई है।
परीक्षा के साथ सरकार की भी अग्निपरीक्षा
करीब 10 साल बाद हो रही J-TET 2026 में 5.60 लाख अभ्यर्थियों की उम्मीदें जुड़ी हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। लेकिन इस परीक्षा की सफलता का पैमाना केवल यह नहीं होगा कि कितने अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। असली सवाल यह होगा कि परीक्षा कितनी निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादमुक्त तरीके से संपन्न होती है। पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच J-TET की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और परीक्षा संचालन व्यवस्था के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
10 साल का इंतजार, 5.60 लाख अभ्यर्थी और 986 परीक्षा केंद्र—J-TET 2026 अब सिर्फ अभ्यर्थियों का इम्तिहान नहीं, बल्कि झारखंड की परीक्षा व्यवस्था और सरकार की विश्वसनीयता की भी बड़ी अग्निपरीक्षा बन गई है।








