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DGP नियुक्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सरकार का जवाब, तदाशा मिश्रा के नाम पर नियम संशोधन का बचाव

Jharkhand DGP

कपिल सिब्बल ने कहा- महिला IPS अधिकारी को मौका देने के लिए Rule-5 में किया संशोधन

Amicus Curiae की रिपोर्ट पर सरकार गुरुवार को रखेगी पक्ष

रांची : झारखंड में नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। बुधवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने Rule-5 में किए गए संशोधन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि DGP रैंक में प्रोन्नत इकलौती महिला अधिकारी तदाशा मिश्रा को मौका देने के लिए नियम में बदलाव किया गया। वहीं, बाबूलाल मरांडी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। मामले में Amicus Curiae की रिपोर्ट भी अदालत के सामने है, जिस पर राज्य सरकार अपना पक्ष रख रही है।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में बहस
झारखंड में DGP नियुक्ति का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। बुधवार, 23 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और बाबूलाल मरांडी की ओर से DGP नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दलीलें रखी गईं। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए DGP नियुक्ति के लिए नियमावली बनाई है। हालांकि, उन्होंने Rule-5 में संशोधन किए जाने की बात स्वीकार की।कपिल सिब्बल के अनुसार, तदाशा मिश्रा DGP रैंक में प्रोन्नत इकलौती महिला अधिकारी हैं और उन्होंने नक्सलवाद तथा अपराध के क्षेत्र में काम किया है। सरकार ने उन्हें DGP पद के लिए अवसर देने के उद्देश्य से Rule-5 में संशोधन किया।

बाबूलाल मरांडी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
सुनवाई के दौरान बाबूलाल मरांडी की ओर से DGP नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। उनकी ओर से दलील दी गई कि झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दलील में पहले UPSC पैनल के जरिए नियुक्त DGP को समय से पहले पद से हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा DGP नियुक्ति के लिए अलग नियम बनाए जाने और उसी नियम के तहत अनुराग गुप्ता को DGP बनाए जाने का उल्लेख किया गया। दलील के अनुसार, अनुराग गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्र सरकार ने उनके सेवा विस्तार को मंजूरी नहीं दी। इसके बाद नियम में बदलाव किया गया और तदाशा मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले DGP के पद पर नियुक्त किया गया। बाबूलाल मरांडी की ओर से इसी प्रक्रिया को लेकर अदालत में आपत्ति दर्ज कराई गई।

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Amicus Curiae की रिपोर्ट में भी नियम संशोधन पर सवाल
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Amicus Curiae से झारखंड के नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले DGP नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के Prakash Singh दिशानिर्देशों के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में झारखंड के 2025 के DGP नियुक्ति नियमों में राज्य सरकार को मिलने वाले व्यापक विवेकाधिकार पर भी आपत्ति जताई गई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि Amicus Curiae की रिपोर्ट अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। यह अदालत की सहायता के लिए प्रस्तुत की गई राय और विश्लेषण है।

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सरकार ने Rule-5 संशोधन का किया बचाव
राज्य सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने Amicus Curiae की रिपोर्ट पर सरकार का पक्ष रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि Amicus Curiae ने मुख्य रूप से Rule-5 में किए गए संशोधन पर आपत्ति जताई है। कपिल सिब्बल ने संशोधन को स्वीकार करते हुए इसके पीछे सरकार की ओर से तदाशा मिश्रा को अवसर देने का तर्क रखा। उन्होंने उनकी सेवा और नक्सलवाद तथा अपराध के खिलाफ काम को भी अदालत के सामने रखा।इससे साफ है कि सुनवाई में फिलहाल विवाद का एक प्रमुख केंद्र Rule-5 में बदलाव और उसके आधार पर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति बना हुआ है।

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सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान पहले ओडिशा से संबंधित मामले पर बहस हुई। इसके बाद झारखंड में DGP नियुक्ति के मुद्दे पर दलीलें रखी गईं। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि Amicus Curiae की रिपोर्ट पर सरकार का विस्तृत पक्ष गुरुवार को रखा जाएगा। इसके बाद अदालत झारखंड में नियमित DGP नियुक्ति के मुद्दे पर आगे के निर्देश दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों में भी झारखंड में नियमित DGP नियुक्ति के मामले को दर्ज किया गया है। 18 अगस्त 2026 के आदेश में अदालत ने झारखंड के मामले में Amicus Curiae को पेपरबुक उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया था।

क्या है पूरे विवाद का केंद्र?
झारखंड DGP नियुक्ति विवाद में मुख्य सवाल केवल किसी एक अधिकारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। अदालत के सामने DGP नियुक्ति की प्रक्रिया, राज्य के 2025 के नियम, Rule-5 में संशोधन और Prakash Singh मामले में तय दिशानिर्देशों के अनुपालन से जुड़े प्रश्न हैं। Amicus Curiae की रिपोर्ट में नियमों और तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि नियम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाए गए हैं और Rule-5 में बदलाव तदाशा मिश्रा को अवसर देने के लिए किया गया। अब गुरुवार की सुनवाई में राज्य सरकार Amicus Curiae की रिपोर्ट पर अपना विस्तृत पक्ष रखेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में कोई निर्देश या आगे की सुनवाई की दिशा तय की जा सकती है। फिलहाल तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए Amicus Curiae की आपत्तियों, बाबूलाल मरांडी की दलीलों और राज्य सरकार के जवाब को संबंधित पक्षों के रुख के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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