धनंजय पुटूस ने पत्रकारों के लिए “सम्मान पेंशन योजना” लागू करने की मांग की, मुख्यमंत्री को सौंपा प्रस्ताव

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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आर्थिक सुरक्षा की दिशा में पहल, सांसद प्रतिनिधि ने CM हेमंत सोरेन को सौंपा मांग पत्र

रांची, झारखंड : झारखंड में पत्रकारों के आर्थिक और सामाजिक संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक पहल की गई है। भाजपा नेता एवं सांसद प्रतिनिधि (मीडिया) धनंजय कुमार पुटूस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र सौंपकर राज्य में “झारखंड पत्रकार सम्मान पेंशन योजना” लागू करने की मांग की है। यह मांग केवल पत्रकार समुदाय की बेहतरी की दिशा में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को संरक्षित रखने की पुकार के रूप में सामने आई है।

धनंजय पुटूस ने अपने पत्र में विस्तार से समझाया कि किस प्रकार पत्रकार आम नागरिक और सत्ता तंत्र के बीच सेतु का कार्य करते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश पत्रकार आर्थिक रूप से उपेक्षित और असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सम्मान का प्रश्न बताया।

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बिहार मॉडल का दिया उदाहरण, झारखंड में भी हो लागू
धनंजय पुटूस ने बिहार सरकार द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों के लिए शुरू की गई पेंशन योजना का हवाला देते हुए बताया कि बिहार में योग्य पत्रकारों को ₹15,000 प्रतिमाह और उनके आश्रित जीवनसाथी को ₹10,000 प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे उभरते राज्य में भी ऐसी ही योजना की नितांत आवश्यकता है।

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प्रस्तावित योजना की प्रमुख बातें:

  • योग्य वरिष्ठ पत्रकारों को ₹15,000 मासिक पेंशन दी जाए।
  • पत्रकार की मृत्यु के बाद, उनके आश्रित जीवनसाथी को ₹10,000 मासिक पेंशन मिले।
  • योजना के लिए पारदर्शी, सरल और व्यावहारिक पात्रता प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
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वरिष्ठ पत्रकारों की दुर्दशा को उजागर किया गया
मांग पत्र में कहा गया है कि झारखंड में सैकड़ों ऐसे पत्रकार हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जवानी, अपनी ऊर्जा, यहां तक कि स्वास्थ्य को भी खबरों की खोज और जनसेवा में झोंक दिया। लेकिन जब वो बुजुर्ग होते हैं, तब न कोई संस्थागत सहायता रहती है, न स्वास्थ्य बीमा, और न ही सामाजिक सुरक्षा |

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“पत्रकार वह सैनिक है, जो बिना हथियार के लोकतंत्र की रक्षा करता है। जब वह थक जाए, बीमार हो जाए या असहाय हो जाए, तो क्या राज्य का यह कर्तव्य नहीं बनता कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे?” – धनंजय पुटूस

राजनीति से परे मानवीय पहल
धनंजय कुमार पुटूस की इस पहल को पत्रकार संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने राजनीति से परे एक मानवीय दृष्टिकोण करार दिया है। यह मांग न केवल मीडिया कर्मियों के अधिकारों की बात करती है, बल्कि सत्ता और मीडिया के रिश्ते को भी नए स्तर पर परिभाषित करती है।

मुख्यमंत्री से उम्मीदें – क्या हेमंत सरकार लेगी ऐतिहासिक फैसला?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पहले भी कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शुरुआत कर चुकी है – चाहे वह मजदूरों के लिए हो, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए या किसानों के लिए। अब देखना होगा कि क्या सरकार पत्रकारों को भी उसी संवेदनशीलता से देखती है और उन्हें ‘सम्मान पेंशन’ की सौगात देती है? अगर यह योजना लागू होती है, तो यह झारखंड को उन चंद राज्यों की सूची में शामिल कर देगी, जहां पत्रकारों की सेवा का सम्मान केवल शब्दों में नहीं, ठोस समर्थन में भी दिखाई देगा।

पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया – समर्थन की लहर
धनंजय पुटूस की इस मांग के बाद पत्रकार संगठनों में उम्मीद की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रीय पत्रकार परिषद, ग्रामीण संवाददाता संघ, और डिजिटल मीडिया फेडरेशन जैसे संगठनों ने इस मांग को तत्काल स्वीकार करने की मांग की है। धनंजय पुटूस की यह पहल पत्रकारिता के गौरव को लौटाने की कोशिश है। यह उन अनसुने बुजुर्ग कलमकारों के सम्मान की मांग है, जिन्होंने समाज को सच दिखाया, लेकिन खुद के लिए कभी कुछ नहीं मांगा। अब वक्त है कि सरकार उनकी सुध ले और उन्हें वो सुरक्षा दे, जो एक सच्चे सेवक का हक है।

यदि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सच में मज़बूत करना है, तो उसे आर्थिक सुरक्षा देना पहला कदम होना चाहिए। और ‘झारखंड पत्रकार सम्मान पेंशन योजना’ उस दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हो सकती है।

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