हैदराबाद में झारखंड एकता समाज का स्थापना दिवस, जयराम महतो ने प्रवासियों को बताया “संघर्षशील योद्धा”, सदन में उठाएंगे अधिकारों की आवाज

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हैदराबाद में झारखंड की आत्मा की गूंज, जयराम महतो ने प्रवासी अधिकारों की लड़ाई का उठाया बीड़ा

हैदराबाद/रांची: हजारों किलोमीटर दूर, लेकिन दिल के बेहद करीब — कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला हैदराबाद के एर्रागड्डा स्थित विक्टोरिया गार्डन में, जहां झारखंड एकता समाज ने अपने आठवें स्थापना दिवस पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुए डुमरी विधायक जयराम महतो ने भावनात्मक संबोधन में न केवल प्रवासी झारखंडियों की पीड़ा साझा की, बल्कि राजनीतिक संकल्प भी लिया कि वह झारखंड विधानसभा में प्रवासी अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद करेंगे।

“यह मंच केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष की कहानी है” – जयराम महतो
अपने भाषण की शुरुआत करते हुए विधायक ने बेहद मार्मिक अंदाज़ में कहा:

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“यह समारोह केवल उत्सव नहीं, बल्कि उनकी अस्मिता का मंच है, जो परिवार, खेत, गांव छोड़कर ईंट-सीमेंट की दुनिया में खुद को खो देते हैं। मैं आज यहां एक जनप्रतिनिधि नहीं, एक प्रवासी बेटे के रूप में खड़ा हूं।”

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गाया गया गीत –
“चार पैसे कमाने मैं आया शहर, गांव मेरा मुझे याद आता रहा…”ने कार्यक्रम में मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। गीत के बाद माहौल पूरी तरह भावनात्मक हो गया, और फिर जयराम महतो ने उस भावना को शब्द देते हुए प्रवासी मजदूरों के हक की लड़ाई की नींव रखी।

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विधानसभा में प्रवासी नीति की मांग करेंगे महतो
जयराम महतो ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे झारखंड विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में प्रवासी मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को मुद्दा बनाएंगे। उन्होंने राज्य सरकार को प्रवासी झारखंडियों के लिए समर्पित नीति बनाने की कड़ी मांग की।

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“जब कोई फैक्ट्री में हाथ कटवा देता है, या किसी निर्माणाधीन इमारत से गिर जाता है – तो कोई नहीं पूछता कि वह झारखंड का बेटा था। अब पूछने वाला होगा – और वह मैं बनूंगा,”

स्थानीय समुदाय और आयोजकों की सराहना
समारोह में भाग लेने वाले प्रवासियों की संख्या सैकड़ों में थी, जिनमें पुरुष, महिलाएं और युवा शामिल थे। रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र, नागपुरी गीतों पर झूमते लोग और झारखंडी खाना — इन सभी ने हैदराबाद में मिनी झारखंड का अहसास कराया।झारखंड एकता समाज के अध्यक्ष और कार्यक्रम आयोजकों ने बताया कि वे इस मंच को केवल सामाजिक मिलन तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि यह एक आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समर्थन प्रणाली के रूप में विकसित होगा।

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प्रवासी झारखंडियों के लिए चाहिए ठोस नीति
विधायक जयराम महतो ने प्रवासी नीतियों पर सरकार की उदासीनता पर भी निशाना साधा साधते हुए कहा कि हर साल लाखों मजदूर तेलंगाना, महाराष्ट्र, केरल, पंजाब जाते हैं, लेकिन राज्य के पास उनकी कोई सूची नहीं, कोई डेटा नहीं। क्या हम इतने गैर-जिम्मेदार हो सकते हैं? महतो ने प्रवासी सहायता केंद्र, हेल्पलाइन, बीमा सुविधा, बच्चों की शिक्षा और पहचान पत्र जैसे विषयों पर सरकार को घेरने की बात कही।

संघर्ष की नई शुरुआत – “चार बच्चे पैदा करो”
कार्यक्रम के अंत में जयराम महतो ने जोश और व्यंग्य के साथ एक मार्मिक संदेश दिया कि हम गांधी के देश में रहते हैं, लेकिन भगत सिंह का खून भी हमारे अंदर है। चार बच्चे पैदा करो – दो पढ़ाई के लिए और दो संघर्ष के लिए। अब हर प्रवासी अपने हक के लिए खड़ा होगा. इन शब्दों ने जैसे समारोह में मौजूद हर व्यक्ति के दिल में आग भर दी। तालियों की गूंज ने इस बात की पुष्टि कर दी कि यह अब केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि जनांदोलन की शक्ल लेने वाला है।

हैदराबाद में आयोजित झारखंड एकता समाज का यह कार्यक्रम महज सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसे मंच का जन्म है, जहां झारखंड की आत्मा और उसकी जमीनी सच्चाई एक साथ गूंजती है। डुमरी विधायक जयराम महतो की पहल अब झारखंड की सियासत में प्रवासी अधिकारों के एजेंडे को एक नया आयाम दे सकती है।यदि यह आंदोलन आकार लेता है, तो आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकता है।

रिपोर्ट : अमित

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