जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र-झारखंड में एमओयू, राज्य को 2500 करोड़ का विशेष आवंटन
हेमंत सोरेन ने केंद्र से 6500 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने की मांग उठाई, हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर जोर
रांची: झारखंड में हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की। बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, केंद्रीय राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जल जीवन मिशन की वर्तमान प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि झारखंड के अंतिम गांव तक सुरक्षित पेयजल की सुविधा पहुंचे और इसके लिए सभी स्तरों पर काम तेज गति से चल रहा है।
झारखंड में 24 हजार करोड़ से अधिक की योजनाएं संचालित
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में लगभग 24,635 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मल्टी विलेज स्कीम (एमवीएस) और सिंगल विलेज स्कीम (एसवीएस) दोनों मॉडल पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि दूरस्थ और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों तक भी नल से जल पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत राज्य में बड़ी संख्या में परियोजनाएं प्रगति पर हैं और कई क्षेत्रों में लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने लगा है।
केंद्र से 6500 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने की मांग
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वित्तीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में राज्य को अपेक्षित स्तर पर केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य में जल जीवन मिशन की लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक केवल 46 प्रतिशत अनुदान राशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने करीब 6500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सके।
परियोजनाओं में एनओसी की देरी बनी चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई महत्वपूर्ण जलापूर्ति परियोजनाएं विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध तरीके से एनओसी जारी करने के निर्देश दिए जाएं ताकि परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी हो सकें।
जल सहियाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग
सिंगल विलेज स्कीम के संचालन और रखरखाव पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जल सहियाओं की नियुक्ति कर चुकी है। प्रत्येक जल सहिया को राज्य सरकार की ओर से 2500 रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहयोग की अपेक्षा जताई।
केंद्र ने स्पष्ट की जल जीवन मिशन 2.0 की नीति
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल जीवन मिशन 2.0 के विभिन्न प्रावधानों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि रेट्रोफिटिंग और नियमित संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से अलग से वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि इन कार्यों के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले अनुदान का उपयोग किया जा सकता है।
झारखंड को 2500 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन
बैठक के दौरान झारखंड के लिए 2500 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन की घोषणा भी की गई। हालांकि यह राशि जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों और मानकों के पूर्ण अनुपालन के बाद जारी की जाएगी। केंद्र सरकार ने राज्य को आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया है ताकि राशि का आवंटन जल्द सुनिश्चित हो सके।
परियोजनाओं की निगरानी करेंगे उपायुक्त
जल जीवन मिशन की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों और जिलाधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को समय रहते दूर किया जा सके।
हर घर नल से जल पहुंचाने का संकल्प
बैठक के अंत में केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से जल जीवन मिशन 2.0 के तहत लंबित परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने और हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का संकल्प दोहराया विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित वित्तीय सहायता समय पर मिल जाती है और परियोजनाओं को प्रशासनिक सहयोग प्राप्त होता है, तो जल जीवन मिशन झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल उपलब्धता के के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है।






