झारखंड में शराब की दुकानों की बंदोबस्ती प्रक्रिया सुस्त, 51% दुकानों पर ही आवेदन

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रांची : झारखंड में नई उत्पाद नीति के तहत शराब की खुदरा दुकानों की बंदोबस्ती प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। राज्य सरकार ने 8 अगस्त से आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन 13 अगस्त की रात तक केवल 51 प्रतिशत दुकानों के लिए ही आवेदन प्राप्त हुए। यह स्थिति विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि राज्य सरकार का लक्ष्य 1 सितंबर से नई दुकानों का संचालन शुरू करने का है।

राज्य में कुल 1453 शराब की खुदरा दुकानें हैं, जिन्हें 560 समूहों में बांटा गया है। हर समूह में 1 से 4 तक दुकानें शामिल की गई हैं। नियम के मुताबिक कोई भी आवेदक अधिकतम 9 समूहों के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि अब तक 560 समूहों में से केवल 286 समूहों पर ही आवेदन आए हैं, जबकि 274 समूह अभी भी खाली पड़े हैं।

जिलावार स्थिति
आवेदन की सुस्ती के बावजूद कुछ जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिसाद देखने को मिला है। रांची जिले में 81 समूह हैं, जिनमें से 51 समूहों पर आवेदन मिले हैं। यानी यहां 75 प्रतिशत आवेदन पूरे हो चुके हैं। इसी तरह रामगढ़ जिले में 12 समूहों में से 11 पर आवेदन मिले हैं, जो 91 प्रतिशत की सर्वाधिक उपलब्धि मानी जा रही है। बोकारो जिले में 33 समूहों में से 25 पर आवेदन (75%), साहिबगंज में 12 में से 9 पर आवेदन (75%), और धनबाद में 51 में से 23 समूहों पर ही आवेदन मिले हैं, जो महज 45 प्रतिशत है। वहीं, पूर्वी सिंहभूम में 45 समूहों में से 19, गिरिडीह में 45 में से केवल 12 और खूंटी में 9 समूहों में से मात्र 3 समूहों पर ही आवेदन मिले हैं। इन जिलों की स्थिति विभाग की चिंता और बढ़ा रही है।

अंतिम तिथि और लॉटरी प्रक्रिया
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आवेदन 20 अगस्त की रात 11:59 बजे तक ही स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन नहीं लिया जाएगा। 22 अगस्त को सभी आवेदनों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और सफल आवेदकों को समूह आवंटित किए जाएंगे। विभाग ने 29 अगस्त तक बंदोबस्ती की पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है ताकि 1 सितंबर से नई शराब दुकानों का संचालन शुरू किया जा सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आवेदन की गति भले ही धीमी है, लेकिन अंतिम तारीख तक इसमें तेजी आ सकती है।

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नई नीति का उद्देश्य
झारखंड सरकार ने इस बार नई उत्पाद नीति के तहत शराब दुकानों की पारदर्शी बंदोबस्ती सुनिश्चित करने के लिए कई बदलाव किए हैं। इसमें ऑनलाइन आवेदन की सुविधा, समूह आधारित दुकानों का निर्धारण और एक आवेदक द्वारा अधिकतम 9 समूहों तक आवेदन की सीमा तय की गई है। इसका उद्देश्य छोटे-बड़े सभी कारोबारियों को अवसर देना और पारदर्शिता लाना है।

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चुनौतियां और संभावनाएं
हालांकि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभी तक आधे से ज्यादा समूह खाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं और अंतिम समय में आवेदन करने की प्रवृत्ति के कारण संख्या बढ़ सकती है। दूसरी ओर, विभाग की चिंता यह भी है कि यदि पर्याप्त आवेदन नहीं आए तो कई समूह खाली रह जाएंगे, जिससे राजस्व पर असर पड़ सकता है। झारखंड सरकार को शराब बिक्री से हर साल बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में दुकानों की बंदोबस्ती में देरी या कम आवेदन मिलने से सरकार की आय प्रभावित हो सकती है। विभाग ने उम्मीद जताई है कि अंतिम तिथि से पहले आवेदनों में तेजी आएगी और लक्ष्य पूरे किए जा सकेंगे।

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कुल मिलाकर, झारखंड में शराब दुकानों की बंदोबस्ती प्रक्रिया इस समय धीमी दिखाई दे रही है। केवल 51 प्रतिशत दुकानों पर आवेदन मिलना विभाग और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि 20 अगस्त तक आवेदन की संख्या कितनी बढ़ती है और 22 अगस्त को होने वाली लॉटरी कितनी पारदर्शी तरीके से पूरी होती है। राज्य सरकार की चुनौती है कि तय समयसीमा में नई दुकानों का संचालन शुरू हो और राजस्व लक्ष्य पर असर न पड़े।

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