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झारखंड शराब घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, आरोपी चुन्नू जायसवाल तीन दिन की रिमांड पर

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वेलकम डिस्टलरीज की भूमिका गहराई से खंगाल रही एजेंसी

रांची: झारखंड में हुए बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। घोटाले से जुड़े कई पहलुओं की परतें खुलने के बाद अब एजेंसी ने एक और अहम आरोपी छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एसीबी ने उन्हें तीन दिनों की कस्टडी में लेकर मामले से जुड़े कई तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई है।

राजेंद्र जायसवाल, जो वेलकम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, झारखंड में देसी शराब की आपूर्ति से जुड़े बड़े नेटवर्क का हिस्सा माने जाते हैं। एसीबी की जांच में यह बात सामने आई है कि वेलकम डिस्टलरीज का नाम केवल झारखंड शराब घोटाले में ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में हुए कथित शराब घोटाले में भी शामिल रहा है। इस संबंध में पहले भी कई खुलासे हो चुके हैं और अब झारखंड की जांच में भी कंपनी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

कैसे आया चुन्नू जायसवाल का नाम झारखंड शराब घोटाले में?
झारखंड में शराब आपूर्ति और बिक्री से जुड़े इस घोटाले में राजेंद्र जायसवाल का नाम तब सामने आया जब एसीबी ने राज्य में देसी शराब की आपूर्ति करने वाली कंपनियों और उनके सप्लाई चेन को खंगालना शुरू किया। जांच में पता चला कि वेलकम डिस्टलरीज को झारखंड में देसी शराब की आपूर्ति का बड़ा ठेका मिला था।

लेकिन इसी आपूर्ति के दौरान कई गंभीर अनियमितताएँ और गड़बड़ियाँ सामने आईं। जांच में मिले नमूनों और दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि आपूर्ति की गई शराब की गुणवत्ता में खामियाँ थीं। कई बैच मानकों के अनुरूप नहीं थे और तकनीकी जांच में कई गंभीर त्रुटियाँ पाई गईं। एसीबी ने इन सभी प्रमाणों को अपनी केस डायरी में शामिल किया है।

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जांच अधिकारियों का प्राथमिक अनुमान है कि शराब सिंडिकेट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर अनुचित तरीके से यह ठेका हासिल किया गया और उसके बाद सप्लाई में भारी धांधली की गई। राजेंद्र जायसवाल से पूछताछ में एसीबी इसी बिंदु पर और विस्तार से जानकारी जुटाने में लगी है।

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रिमांड पर पूछताछ—कई वित्तीय लेन-देन से जुड़े सवालों पर फोकस
चुन्नू जायसवाल को तीन दिन की रिमांड पर लेने का मुख्य उद्देश्य उनके वित्तीय लेनदेन, कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट पैटर्न, सप्लाई चेन और अन्य राज्यों में बने संपर्कों की गहराई से जांच करना है। एसीबी उनके बैंक खातों, कंपनी के फंड ट्रांसफर, सप्लाई के दौरान किए गए भुगतान और संदिग्ध ट्रांजैक्शनों को भी खंगाल रही है।

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जांच सूत्रों के अनुसार, एसीबी यह समझने की कोशिश कर रही है कि—
क्या वेलकम डिस्टलरीज को झारखंड में ठेका मिलने के पीछे कोई प्रभावशाली राजनीतिक या प्रशासनिक दखल था?
क्या चुन्नू जायसवाल ने किसी बड़े नेटवर्क के साथ मिलकर ठेका हासिल किया?
क्या शराब की आपूर्ति में भारी पैमाने पर कमीशन और रिश्वत का लेनदेन हुआ?
क्या झारखंड में मिली आपूर्ति से हुए मुनाफे को छत्तीसगढ़ या अन्य राज्यों में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए घुमाया गया? रिमांड की अवधि एसीबी को इन सभी पहलुओं की गहराई तक जाने का अवसर दे रही है।

छत्तीसगढ़ कनेक्शन—दो राज्यों के घोटाले जोड़ते धागे
यह पहला मौका नहीं है जब चुन्नू जायसवाल या उनकी कंपनी वेलकम डिस्टलरीज का नाम किसी बड़े घोटाले से जुड़ा है।
छत्तीसगढ़ में हुए कथित शराब घोटाले में भी उनका नाम बार-बार सामने आया था। वहां भी आरोप लगा था कि उन्होंने शराब आपूर्ति के नाम पर सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया।

अब झारखंड की जांच में इन दोनों राज्यों के नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। एसीबी यह पता लगा रही है कि कहीं दोनों राज्यों में एक ही समूह के लोग धांधली तो नहीं चला रहे थे। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह मामला और अधिक गंभीर हो सकता है।

जांच में मिले तकनीकी साक्ष्य—गुणवत्ता में खामी, सप्लाई में अनियमितता
ACB की टीम ने झारखंड में वेलकम डिस्टलरीज द्वारा आपूर्ति की गई देसी शराब के नमूनों की जांच कराई, जिसमें कई विसंगतियाँ सामने आईं। कुछ सैंपलों में मानक से कम अल्कोहल पाया गया, जबकि कुछ में अशुद्धियाँ थीं। यह भी पाया गया कि जिन बैचों की गुणवत्ता रिपोर्ट संदिग्ध थी, वही बैच अलग-अलग जिलों में भेजे गए। इन तकनीकी साक्ष्यों ने एसीबी की जांच को और मजबूत कर दिया है।

ACB की पूछताछ से खुल सकते हैं कई बड़े खुलासे
राजेंद्र उर्फ चुन्नू जायसवाल की रिमांड पर पूछताछ इस मामले का सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है। यह जांच न केवल शराब घोटाले की परतें खोलेगी, बल्कि इस बात का भी पता लगाएगी कि देसी शराब आपूर्ति का ठेका किन परिस्थितियों में मिला और कैसे इसे क्रियान्वित किया गया।

आने वाले दिनों में एसीबी कई और लोगों को तलब कर सकती है और संभव है कि इस जांच के दायरे में उद्योग जगत, प्रशासन और सप्लाई चेन के कई बड़े नाम भी शामिल हों। शराब घोटाले से जुड़े नए खुलासे राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल मचाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए चुन्नू जायसवाल से हुई पूछताछ को एसीबी की अभी तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।

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