पुष्पा हत्याकांड: जांच में सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, DGP-SP समेत पूरी टीम तलब

Pushpa murder case High court

डीएनए जांच में देरी पर फटकार, गुरुवार सुबह 10:30 बजे कोर्ट में पेश होने का आदेश

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो के चर्चित पुष्पा हत्याकांड मामले में जांच की धीमी रफ्तार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को फटकार लगाते हुए शीर्ष अधिकारियों को सीधे कोर्ट में तलब कर लिया है। कोर्ट ने राज्य के डीजीपी, एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) निदेशक, बोकारो के एसपी और पूरी एसआईटी टीम को गुरुवार सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

अदालत का यह रुख इस बात का संकेत है कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

डीएनए जांच में देरी पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात पर जताई कि मामले में बरामद कंकाल की डीएनए जांच अब तक पूरी नहीं कराई गई है। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इस तरह की जांच में देरी से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि डीएनए जांच किसी भी हत्या के मामले में बेहद अहम कड़ी होती है, जिससे पीड़ित की पहचान और घटना की सच्चाई सामने आती है। ऐसे में महीनों तक जांच लंबित रखना जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

9 महीने से लापता थी युवती
यह पूरा मामला एक 18 वर्षीय युवती से जुड़ा है, जो पिछले 9 महीनों से लापता थी। बाद में एक कंकाल बरामद हुआ, जिसके आधार पर हत्या की आशंका जताई गई। हालांकि, इतने लंबे समय के बाद भी जांच में ठोस प्रगति नहीं होने से कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। परिवार लंबे समय से न्याय की मांग कर रहा था, लेकिन जांच की धीमी गति के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा था।

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SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल
अदालत ने इस मामले में गठित एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट का कहना है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में जांच एजेंसियों को अधिक सक्रिय और जिम्मेदार होना चाहिए था। इसके बावजूद जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखने से यह सवाल उठता है कि क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है या नहीं। इसी कारण कोर्ट ने पूरी टीम को तलब कर जवाब मांगा है।

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प्रशासन के लिए सख्त संदेश
हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासन के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर मामलों में लापरवाही और ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां अब तेजी से काम करेंगी और जल्द ही इस मामले में ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है।

न्याय की उम्मीद बढ़ी
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पीड़ित परिवार को अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार लंबे समय से इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रहा था। अब जब शीर्ष अधिकारियों को सीधे कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है, तो यह माना जा रहा है कि जांच में तेजी आएगी और सच्चाई सामने आएगी।

पुष्पा हत्याकांड में हाईकोर्ट की सख्ती ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। जांच एजेंसियों पर अब दबाव बढ़ गया है कि वे तेजी से कार्रवाई करें और दोषियों को कानून के कटघरे में लाएं। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

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