भुरकुंडा में वर्दी पर दाग: थाना प्रभारी निर्भय कुमार पद से हटाए गए, वायरल वीडियो के बाद मचा बवाल

Bhurkunda Police Station

रामगढ़ से मुकेश सिंह : झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस की वर्दी एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भुरकुंडा थाना प्रभारी निर्भय कुमार को पुलिसिया बर्बरता के आरोप में उनके पद से हटा दिया गया है। एसपी अजय कुमार ने तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की है और उपेंद्र कुमार को नया थाना प्रभारी बनाया गया है।

यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें थाना प्रभारी निर्भय कुमार पर एक आम नागरिक की सरेआम पिटाई का आरोप लगा था। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।

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क्या है पूरा मामला?
घटना भुरकुंडा मेन रोड की है, जहाँ मंगलवार की शाम एक दवा कारोबारी मनीष सिन्हा को थाना प्रभारी ने सरेआम डंडे से पीटा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थाना प्रभारी उस वक्त सिविल ड्रेस (बिना वर्दी) में एक बोलेरो गाड़ी चला रहे थे और जाम हटाने के क्रम में यह विवाद हुआ। बताया गया कि मनीष और उनके सहयोगी अतुल कुमार दवा के कारोबार के सिलसिले में भुरकुंडा जा रहे थे। बाजार में जाम लगने पर थाना प्रभारी ने गाड़ी साइड करने को कहा, जिस पर कहासुनी हो गई। इसी दौरान उन्होंने कथित रूप से मनीष पर डंडा चला दिया, जिससे उनका सिर फट गया और खून बहने लगा।

घटना के तुरंत बाद पूरे बाजार में अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया। भीड़ ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और मौके का वीडियो बना लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि थाना प्रभारी खुद गाड़ी चला रहे हैं और विवाद के दौरान एक आम नागरिक पर हाथ उठा रहे हैं।

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वायरल वीडियो ने बदला पूरा घटनाक्रम
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें एक राहगीर कमेंट्री करते हुए पूरा दृश्य रिकॉर्ड कर रहा था। वीडियो में मनीष और उनके साथी घायल अवस्था में दिख रहे हैं, जबकि थाना प्रभारी गुस्से में हाथापाई करते नजर आते हैं।

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वीडियो वायरल होते ही रामगढ़ पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव बढ़ गया। स्थानीय व्यापारी संघ और नागरिक संगठनों ने थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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थाना प्रभारी का बयान: “हम पर हमला हुआ था”
विवाद बढ़ने के बाद थाना प्रभारी निर्भय कुमार ने खुद अपना पक्ष रखते हुए कहा —

“मैं सिविल में छापेमारी कर लौट रहा था। जाम में अपराधी वाहन भी फंसे थे। उसी दौरान कार सवार युवकों ने गाड़ी रोककर मुझ पर हमला कर दिया। मनीष का सिर कैसे फटा, इसकी जानकारी नहीं है। मैंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।”

हालाँकि, प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो फुटेज से यह दावा कमज़ोर पड़ता दिख रहा है।

पुलिस का आधिकारिक एक्शन
घटना की जानकारी मिलते ही पतरातू अंचल के इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार जांच के लिए मौके पर पहुंचे। फिलहाल आरोपियों के रूप में बताए जा रहे मनीष और अतुल को PR बॉन्ड पर छोड़ दिया गया है। जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपी गई, जिसके बाद भुरकुंडा थाना प्रभारी निर्भय कुमार को पद से हटा दिया गया।

स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद भुरकुंडा बाजार में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है, लेकिन जब वही जनता पर हमला करे तो भरोसा कैसे रहेगा?

वर्दी पर दाग या सिस्टम की बीमारी?
भुरकुंडा की यह घटना सिर्फ एक पुलिस अफसर की गलती नहीं, बल्कि उस “सिस्टम” की तस्वीर है जिसमें जवाबदेही और संवेदनशीलता धीरे-धीरे खत्म हो रही है। पुलिस और जनता के बीच विश्वास तभी कायम हो सकता है जब वर्दी कानून की नहीं, मानवता की रखवाली करे।

रामगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जांच केवल स्थानांतरण या सस्पेंशन तक सीमित न रहे, बल्कि सच्चाई सार्वजनिक की जाए ताकि भविष्य में कोई वर्दीधारी “कानून से ऊपर” होने की भूल न करे।

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