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राष्ट्रपति ने झारखंड कारखाना संशोधन विधेयक को दी मंजूरी, अब महिलाएं कर सकेंगी रात्रि पाली में काम

Jharkhand Factory Amendment Bill Jharkhand Factory Amendment Bill

रांची: झारखंड में औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड कारखाना संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस अधिनियम के लागू होते ही राज्य के कारखानों में अब महिला श्रमिक रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में भी काम कर सकेंगी। राज्य सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा में पारित कराकर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास भेजा था। मंजूरी मिलते ही यह राज्य का कानून बन गया है।

पृष्ठभूमि और बदलाव का उद्देश्य
झारखंड के औद्योगिक इलाकों—जैसे बोकारो, जमशेदपुर, रांची और हजारीबाग—में बड़ी संख्या में कारखाने और उत्पादन इकाइयां हैं। अब तक कारखाना अधिनियम 1948 के तहत महिलाओं के रात्रि पाली में काम करने पर प्रतिबंध था, जिससे महिला श्रमिकों की नौकरी के अवसर सीमित हो जाते थे।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य और जेंडर इक्विटी के सिद्धांत के तहत महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, कई सेक्टर जैसे—टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल—24×7 उत्पादन चक्र पर आधारित होते हैं, जहां महिला श्रमिकों का योगदान भी अहम है।

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सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर
नाइट शिफ्ट में महिलाओं के काम करने की अनुमति के साथ सरकार ने सख्त सुरक्षा प्रावधान भी जोड़े हैं। इनमें शामिल हैं—

  • कारखानों में CCTV निगरानी व्यवस्था
  • महिला सुरक्षा अधिकारी और हेल्पलाइन नंबर
  • रात्रि पाली के दौरान कारखाना परिसर तक सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था
  • महिला कर्मचारियों के लिए अलग रेस्ट रूम और टॉयलेट सुविधाएं
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सरकार का कहना है कि बिना सुरक्षा प्रोटोकॉल के किसी भी कारखाने को महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम पर रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
राज्य के श्रम मंत्री ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि “आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। यह संशोधन उन्हें औद्योगिक उत्पादन में बराबरी का हिस्सा देगा।”

महिला संगठनों ने भी इसका स्वागत किया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन न होने पर यह कदम उल्टा भी पड़ सकता है।

औद्योगिक विकास को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। कई कंपनियां पहले नाइट शिफ्ट में महिलाओं को काम पर नहीं रख पाने के कारण उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में दिक्कत महसूस करती थीं। अब वे 24 घंटे उत्पादन का लाभ उठा सकेंगी।

संभावित चुनौतियां
हालांकि इस फैसले से नए अवसर खुलेंगे, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं—

  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रात्रिकालीन परिवहन और सड़क सुरक्षा की कमी
  • कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न और भेदभाव की आशंका
  • छोटे कारखानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पालन सुनिश्चित करना

राष्ट्रपति की मंजूरी का महत्व
इस विधेयक को मंजूरी देने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद झारखंड से हैं और राज्य की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल रह चुकी हैं। उनका हस्ताक्षर इस बदलाव को राजनीतिक और सामाजिक प्रतीकात्मक महत्व भी देता है। झारखंड कारखाना संशोधन विधेयक का लागू होना राज्य के औद्योगिक विकास और महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही सरकार, उद्योग और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा और समान अवसर केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी हकीकत बनें।

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