रेबीज से बचाव को लेकर पाकुड़ प्रशासन की पहल
उपायुक्त ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी, जिलेभर में चलेगा अभियान
Pakur: रेबीज जैसी घातक और जानलेवा बीमारी से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, पाकुड़ की ओर से एक व्यापक जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इसी क्रम में रेबीज जागरूकता रथ को उपायुक्त मनीष कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी एवं जिला गव्य विकास पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया गया।
यह जागरूकता रथ जिले के अलग-अलग इलाकों में भ्रमण कर आम लोगों को रेबीज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां देगा। रथ के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि कुत्ते या बिल्ली के काटने से रेबीज हो सकता है, जो एक अत्यंत गंभीर और प्रायः जानलेवा बीमारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, लेकिन समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है।
जागरूकता रथ पर लगाए गए सूचना-पटों और प्रचार सामग्री के जरिए नागरिकों को बताया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते या बिल्ली ने काट लिया हो, तो उसे घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और साफ बहते पानी से धोना चाहिए। इसके बाद तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज टीका लगवाना अनिवार्य है। प्रशासन ने बताया कि यह टीका सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है।
अभियान के दौरान लोगों को पालतू कुत्तों और बिल्लियों का नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण कराने, पशुओं के संपर्क में आने के बाद हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि सही जानकारी और सतर्कता ही रेबीज जैसी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि समय पर टीकाकरण, स्वच्छता और सावधानी अपनाकर न केवल स्वयं बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन रेबीज मुक्त पाकुड़ के लक्ष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे।
जागरूकता रथ के माध्यम से चलाया जा रहा यह अभियान जिले में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से लोगों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





