19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का होगा शुभारंभ

Chaitra Navratri

मुनादी लाइव : भारत में शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होगा। इसी दिन से हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी शुभारंभ होगा।

चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। देशभर के मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर श्रद्धालु उपवास और पूजा-अर्चना के साथ देवी की आराधना करते हैं।

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कलश स्थापना का महत्व
नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है। यह देवी शक्ति के आह्वान का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश स्थापना के साथ ही घर या मंदिर में मां दुर्गा का निवास माना जाता है। इसलिए इसे शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है।

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रमेश सिंह
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कलश स्थापना के समय मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं, कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं और देवी दुर्गा का आवाहन किया जाता है।

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चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थान को साफ करें। इसके बाद लकड़ी के आसन पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

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इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें। कलश को जौ से भरे पात्र के ऊपर स्थापित किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप कर पूजा आरंभ की जाती है।

नौ दिनों तक नियमित रूप से दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा और देवी मंत्रों का पाठ किया जाता है।

नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूप
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है—

  1. मां शैलपुत्री
  2. मां ब्रह्मचारिणी
  3. मां चंद्रघंटा
  4. मां कूष्मांडा
  5. मां स्कंदमाता
  6. मां कात्यायनी
  7. मां कालरात्रि
  8. मां महागौरी
  9. मां सिद्धिदात्री

हर दिन देवी के अलग स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और शक्ति की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि व्रत के नियम
नवरात्रि के दौरान कई श्रद्धालु नौ दिन का व्रत रखते हैं। व्रत में सात्विक भोजन किया जाता है और अनाज का सेवन नहीं किया जाता। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंहाड़े के आटे से बने भोजन का सेवन किया जाता है। इस दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखने का विशेष महत्व माना जाता है।

क्यों खास रहेगा विक्रम संवत 2083
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष अधिक मास पड़ने के कारण हिंदू पंचांग में कुल 13 महीने होंगे। इसी कारण यह वर्ष विशेष माना जा रहा है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है—

  • चैत्र नवरात्रि
  • आषाढ़ नवरात्रि (गुप्त)
  • आश्विन नवरात्रि (शारदीय)
  • माघ नवरात्रि (गुप्त)

इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति की उपासना का संदेश देता है। भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति, समृद्धि और जीवन में सफलता की कामना करते हैं।

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