पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला, 17% से घटाकर 7% किया गया कोटा

West Bengal OBC Reservation

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदली आरक्षण व्यवस्था, कई मुस्लिम उप-जातियां सूची से बाहर

कोलकाता: West Bengal में OBC आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। Calcutta High Court के फैसले के बाद राज्य सरकार ने OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल 66 जातियों को ही OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि धर्म आधारित वर्गीकरण की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बड़ा बदलाव
कोलकाता हाईकोर्ट ने 2010 से 2012 के बीच OBC सूची में शामिल की गई 77 नई जातियों की प्रक्रिया को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। अदालत के फैसले के बाद 2010 के बाद जारी लगभग 12 लाख OBC प्रमाणपत्र रद्द हो गए हैं। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन मुस्लिम उप-जातियों पर पड़ा है जिन्हें पूर्ववर्ती Mamata Banerjee सरकार के दौरान OBC सूची में शामिल किया गया था।

खत्म हुआ OBC-A और OBC-B फॉर्मूला
ममता सरकार ने OBC आरक्षण को दो हिस्सों में बांटा था:

  • OBC-A : 10 प्रतिशत
  • OBC-B : 7 प्रतिशत

इस दौरान कई नई जातियों को सूची में जोड़ा गया था। विपक्ष लगातार इस पर “तुष्टिकरण” और “वोट बैंक राजनीति” के आरोप लगाता रहा। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह पूरी व्यवस्था बदल गई है।

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पुरानी नौकरियों पर असर नहीं
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2010 से पहले OBC सूची में शामिल जातियों का दर्जा बरकरार रहेगा। इसके साथ ही OBC कोटे के तहत पहले से नौकरी पा चुके लोगों की नियुक्तियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने नई जांच समिति बनाने का भी फैसला लिया है, जो OBC ढांचे की दोबारा समीक्षा करेगी।

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अग्निमित्रा पॉल ने क्या कहा
राज्य मंत्री Agnimitra Paul ने कहा कि अदालत द्वारा चिन्हित समूहों की पहले जांच होगी। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कुछ समुदायों को दोबारा सूची में शामिल किया जा सकता है।

नई सूची में कौन-कौन शामिल
नई OBC सूची में कई पारंपरिक पिछड़ी जातियों को शामिल रखा गया है। इनमें प्रमुख हैं:

  • कपाली
  • कुर्मी
  • कर्मकार
  • सूत्रधार
  • स्वर्णकार
  • नाई
  • तांती
  • धनुक
  • कसाई
  • खंडायत
  • तुरहा
  • देवांग
  • गोआला

इसके अलावा पहाड़िया, हज्जाम और चौधुली जैसे कुछ मुस्लिम समुदाय भी सूची में बने हुए हैं।

बंगाल की राजनीति में बढ़ा विवाद
OBC आरक्षण में इस बड़े बदलाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष इसे “संवैधानिक सुधार” बता रहा है, जबकि कई संगठन और प्रभावित समुदाय इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

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