करमा पर्व पर हेमंत सरकार की सौगात, रांची जिले की 3.78 लाख महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना की राशि

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मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत अगस्त माह में 94.66 करोड़ रुपये का आधार आधारित भुगतान, प्रत्येक लाभुक महिला को 2500 रुपये की सम्मान राशि

रांचीः झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने करमा पर्व के अवसर पर राज्य की महिलाओं को एक बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत केवल रांची जिले की 3,78,641 महिलाओं के बैंक खातों में अगस्त माह की सम्मान राशि हस्तांतरित की गई है। इस योजना के तहत हर लाभुक महिला को 2,500 रुपये मासिक दिए जाते हैं। कुल मिलाकर रांची जिले की महिलाओं को 94.66 करोड़ रुपये की राशि का आधार आधारित भुगतान किया गया है।

गांव-गांव तक पहुंचा लाभ
इस योजना के लाभुकों की सूची पर नजर डालें तो यह केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव तक इसकी पहुंच है। बेड़ो की 20,672 महिलाएं, मांडर की 23,234 महिलाएं, सिल्ली की 21,234 महिलाएं, तमाड़ की 18,486 महिलाएं और कांके की 31,487 महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला। वहीं, रांची शहरी क्षेत्रों की हजारों महिलाओं को भी यह सम्मान राशि दी गई।

करमा पर्व पर मिली आर्थिक मजबूती
करमा पर्व झारखंड की आदिवासी-आद्रजन जातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे महिलाएं विशेष रूप से उत्साह से मनाती हैं। ऐसे समय में जब परिवार की महिलाएं त्योहार की तैयारी करती हैं, इस सम्मान राशि का मिलना आर्थिक मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि “यह राशि महिलाओं में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भरेगी और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से हो।”

महिलाओं को साधने की कोशिश
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह कदम केवल एक कल्याणकारी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति भी मानी जा रही है। झारखंड की राजनीति में महिला मतदाताओं की बड़ी भूमिका है। 2024 लोकसभा चुनाव में भी देखा गया कि ग्रामीण इलाकों की महिलाएं मतदान केंद्रों पर अधिक संख्या में पहुंचीं। ऐसे में सरकार का यह सीधा लाभ हस्तांतरण महिला मतदाताओं को लुभाने का प्रयास समझा जा रहा है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि हेमंत सरकार की यह योजना ग्रामीण परिवारों की अर्थव्यवस्था में सीधा असर डाल रही है। 2,500 रुपये भले ही बड़ी राशि न हो, लेकिन यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो रही है। चुनावी दृष्टिकोण से यह सीधा संदेश देता है कि सरकार महिलाओं की भागीदारी और सम्मान को प्राथमिकता देती है।

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विपक्ष का रुख और सवाल
वहीं, विपक्षी दलों ने इस योजना पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा के नेताओं का कहना है कि सरकार केवल चुनाव को ध्यान में रखकर महिलाओं को लुभाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है। उनका आरोप है कि राज्य में बेरोजगारी, पलायन और स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही और सिर्फ नकद राशि बांटकर वोट बैंक साधने की कोशिश कर रही है।

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भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि राज्य के सभी जिलों की महिलाओं को समय पर राशि नहीं मिलती। कई जगहों पर तकनीकी कारणों से भुगतान में देरी होती है और सरकार आंकड़ों के सहारे अपनी छवि चमकाने में लगी है।

महिला मतदाताओं पर संभावित असर
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि मंईयां सम्मान योजना का असर 2024 लोकसभा और 2025 विधानसभा चुनावों में साफ देखा जाएगा। झारखंड की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं और इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण आदिवासी और पिछड़े वर्ग की है। ऐसे में सीधा नकद हस्तांतरण महिलाओं के बीच सरकार की छवि को मजबूत कर सकता है। झारखंड के ग्रामीण समाज में अक्सर महिलाओं को आर्थिक फैसलों से दूर रखा जाता है, लेकिन यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में जाती है, जिससे उन्हें अपने खर्चों पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिल रही है। यही कारण है कि कई महिलाएं इसे “सरकार की ओर से सच्चा सम्मान” मान रही हैं।

करमा पर्व के मौके पर हेमंत सोरेन सरकार का यह फैसला महिलाओं के लिए तोहफे के रूप में सामने आया है। राजनीतिक रूप से देखें तो यह महिला मतदाताओं को साधने की बड़ी रणनीति है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी लाभ उठाने की कोशिश बता रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले उपचुनाव और विधानसभा चुनावों में इस योजना का कितना असर देखने को मिलता है।

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