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पतरातु अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट में विस्थापित ग्रामीणों का प्रदर्शन, आठ सूत्री मांगों के साथ प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

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रामगढ़: पतरातु स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के बाहर सोमवार को विस्थापित और प्रभावित ग्रामीणों ने अपने हक और मुआवजे की मांग को लेकर प्रबंधन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। झामुमो रैयत विस्थापित-प्रभावित समिति के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए, जिन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों पहले PTPS परियोजना के लिए अधिग्रहित उनकी हजारों एकड़ जमीन पर अब जियाडा के माध्यम से अल्ट्राटेक प्लांट संचालित हो रहा है, जबकि आज भी वे रोजगार और पुनर्वास के बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं।

विस्थापन के बाद भी बेरोजगारी की मार, प्रवास को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन छिनने के बाद उन्हें रोजगार का कोई स्थायी अवसर नहीं मिला। कई परिवार प्रवासी मजदूर बन चुके हैं और आज भी अपने ही इलाके में हाशिये पर खड़े हैं। समिति के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि विस्थापितों को न नौकरी मिली, न समुचित पुनर्वास, और न ही प्रभावित गांवों में विकास कार्य हुए।

ज्ञापन में कहा गया—
“हमारी जमीन पर उद्योग खड़ा हुआ, लेकिन हम ही अपने हक-अधिकार के लिए दर-दर भटक रहे हैं।”

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रोजगार प्राथमिकता, प्रदूषण नियंत्रण और CSR कार्यों की मांग
ग्रामीणों ने प्लांट प्रबंधन को आठ मुख्य मांगें प्रस्तुत कीं, जिनमें स्थानीय लोगों को स्थायी और अस्थायी रोजगार में प्राथमिकता, प्रदूषण नियंत्रण, वाहनों की गति-सीमा, पानी छिड़काव, पार्किंग व्यवस्था और CSR के तहत विकास कार्य शामिल हैं।

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ग्रामीणों ने कहा कि प्लांट से उठने वाली धूल और प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। फसलें प्रभावित हो रही हैं और सड़क किनारे बसे गांवों में लगातार धूल का प्रदूषण फैल रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट से आने-जाने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।

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CSR में विकास कार्यों की मांग, मासिक बैठक का प्रस्ताव
ग्रामीणों ने CSR मद से प्रभावित गांवों में नियमित विकास कार्यों की मांग की और कहा कि भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए मासिक बैठक होनी चाहिए। समिति ने कहा कि CSR का लाभ गांवों तक नहीं पहुंचने से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

10 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
झामुमो रैयत विस्थापित-प्रभावित समिति ने स्पष्ट कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर प्लांट प्रबंधन उनकी मांगों पर सकारात्मक वार्ता शुरू नहीं करता, तो वे चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। समिति ने चेतावनी दी कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्लांट प्रबंधन पर होगी।

समिति के नेताओं की उपस्थिति
इस ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के अध्यक्ष योगेंद्र यादव, सचिव मुमताज अंसारी, मुख्य संरक्षक झरी मुंडा, रंजीत बेसरा, महादेव करमाली, चंद्रनाथ मांझी, आजाद राय, बलराम करमाली समेत बड़ी संख्या में पुरुष व महिला ग्रामीण उपस्थित रहे।

वैसे तो प्लांट प्रबंधन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रबंधन उनकी बातों को गंभीरता से सुनेगा।

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