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पाकुड़ में कोल कंपनी के अधिकारी से 50 लाख की रंगदारी

Extortion Case

नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी; पुलिस जांच में जुटी

पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले में कोल माइनिंग से जुड़ी कंपनी के एक अधिकारी से रंगदारी मांगे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जिले के अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में कार्यरत कोल कंपनी बीजीआर माइनिंग इंफ्रा लिमिटेड के एक अधिकारी को फोन पर 50 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई है। इस मामले में अमड़ापाड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस उस मोबाइल नंबर को ट्रेस करने में जुट गई है, जिससे यह धमकी भरा कॉल किया गया था।

हालांकि मामला बेहद संवेदनशील होने के बावजूद पुलिस फिलहाल इस पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है। वहीं रंगदारी की मांग सामने आने के बाद कोल कंपनी के कर्मियों और अधिकारियों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।

अनजान नंबर से आया धमकी भरा कॉल, 50 लाख की मांग
मिली जानकारी के अनुसार, बीते दिनों बीजीआर माइनिंग इंफ्रा लिमिटेड में पेट्रोलिंग इंचार्ज के पद पर कार्यरत मधुसूदन के मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद का परिचय स्पष्ट रूप से नहीं दिया, लेकिन सीधे 50 लाख रुपये की रंगदारी की मांग कर डाली। कॉल के दौरान अपराधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि रंगदारी की रकम नहीं दी गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। फोन पर मिल रही धमकी से घबराए मधुसूदन ने तत्काल अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया।

फोन बंद करने पर अपराधियों ने दूसरे कर्मी को दी धमकी
मधुसूदन द्वारा मोबाइल फोन बंद किए जाने के बाद अपराधियों ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए कोल कंपनी के ही एक अन्य कर्मी को कॉल किया। इस कॉल में उस कर्मी को मधुसूदन तक संदेश पहुंचाने को कहा गया और साथ ही उसे भी धमकी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि अपराधी कंपनी के अंदरूनी ढांचे और कर्मचारियों के बारे में कुछ हद तक जानकारी रखते हैं। यही बात कोल कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को और अधिक डरा रही है।

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अमड़ापाड़ा थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी
धमकी भरे कॉल के बाद पेट्रोलिंग इंचार्ज मधुसूदन ने अमड़ापाड़ा थाने में पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच शुरू कर दी है, जिससे रंगदारी की मांग की गई थी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन और नेटवर्क गतिविधियों के माध्यम से अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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कोल कंपनी के कर्मियों में दहशत, सुरक्षा को लेकर चिंता
रंगदारी की इस घटना के बाद कोल कंपनी से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों में भय का वातावरण बन गया है। खनन क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है और इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस तरह की धमकियां काम करने के माहौल को प्रभावित करती हैं। लोगों में यह डर बैठ गया है कि आने-जाने के दौरान कोई अनहोनी न हो जाए।

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एसडीपीओ का बयान: जांच जारी, गिरफ्तारी फिलहाल नहीं
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी विजय कुमार ने बताया कि कोल कंपनी के अधिकारी से रंगदारी मांगे जाने को लेकर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है, लेकिन फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। एसडीपीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ मानवीय इनपुट पर भी काम किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
पाकुड़ और आसपास के इलाकों में कोल माइनिंग और पत्थर खनन से जुड़ी कंपनियों से रंगदारी मांगे जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कई मामलों में यह स्थानीय अपराधियों का काम पाया गया, तो कहीं संगठित गिरोहों की भूमिका भी उजागर हुई। इस वजह से इस ताजा मामले को भी बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल कानून-व्यवस्था, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कोल कंपनी के अधिकारी से खुलेआम 50 लाख की रंगदारी मांगे जाने की घटना ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अपराधियों के हौसले इतने कैसे बढ़ गए कि वे सीधे अधिकारियों को धमकी देने लगे। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों की मांग है कि पुलिस जल्द से जल्द अपराधियों को गिरफ्तार करे और कोल क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में दर्ज यह रंगदारी का मामला अब पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन जब तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक कोल कंपनी कर्मियों में व्याप्त डर खत्म होना मुश्किल है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस कितनी तेजी से धमकी देने वालों तक पहुंचती है और क्या इस मामले में कोई संगठित गिरोह सामने आता है या नहीं। यह मामला आने वाले दिनों में पाकुड़ की कानून-व्यवस्था की दिशा और दशा तय कर सकता है।

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