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झामुमो का बड़ा दांव: बैद्यनाथ राम बने राज्यसभा उम्मीदवार, दूसरी सीट पर अब भी सस्पेंस

Baidyanath Ram

सोरेन परिवार के नामों पर विराम, हेमंत सोरेन ने अनुभवी दलित चेहरे पर लगाया दांव

रांची: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपना पहला पत्ता खोल दिया है। पार्टी ने लातेहार से कई बार विधायक रह चुके और वर्तमान मंत्री बैद्यनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। हालांकि दूसरी सीट को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो गई है।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एवं पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बैद्यनाथ राम के नाम पर अंतिम मुहर लगाई है।

सोरेन परिवार के नामों पर लग गई विराम की मुहर
राज्यसभा की वह सीट, जो झामुमो संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, उसे लेकर लंबे समय से चर्चा थी कि सोरेन परिवार का कोई सदस्य इस सीट पर उम्मीदवार बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजनी सोरेन ने सार्वजनिक रूप से राज्यसभा जाने की इच्छा भी जताई थी। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी इसको लेकर चर्चा थी। लेकिन झामुमो नेतृत्व ने परिवार से बाहर जाकर बैद्यनाथ राम जैसे अनुभवी और संगठन के प्रति समर्पित नेता पर भरोसा जताकर सभी को चौंका दिया।

कौन हैं बैद्यनाथ राम?
बैद्यनाथ राम झारखंड की राजनीति में एक मजबूत दलित चेहरे के रूप में पहचान रखते हैं। लातेहार विधानसभा क्षेत्र से वे कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश राम को हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी। राजनीतिक जीवन में उन्होंने जदयू, भाजपा और बाद में झामुमो के साथ काम किया है। अर्जुन मुंडा सरकार में वे स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैद्यनाथ राम की उम्मीदवारी के जरिए झामुमो दलित, पिछड़ा और ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत संदेश देना चाहती है।

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दूसरी सीट पर अभी फैसला बाकी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि झामुमो ने अभी केवल एक उम्मीदवार की घोषणा की है। दूसरी राज्यसभा सीट को लेकर पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दूसरी सीट पर फैसला पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन लेंगे और उचित समय पर इसकी जानकारी दी जाएगी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रांची दौरे के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है। माना जा रहा है कि झामुमो अभी कांग्रेस के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है।

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कांग्रेस से तनातनी के बीच आया फैसला
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और झामुमो के बीच पिछले कुछ दिनों से खींचतान की खबरें सामने आ रही थीं। कांग्रेस पहले ही प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। झामुमो नेताओं का मानना था कि कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगियों को पूरी तरह विश्वास में लिए बिना उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बातचीत और तेज हो गई। अब बैद्यनाथ राम की घोषणा के बाद यह सवाल उठने लगा है कि दूसरी सीट पर महागठबंधन किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।

भाजपा ने भी बढ़ाई चुनौती
राज्यसभा चुनाव को और रोचक बनाने का काम भाजपा ने किया है। संख्या बल अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद भाजपा ने भी उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया है। भाजपा की ओर से आर्थिक मामलों के जानकार और पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ का नाम सबसे आगे चल रहा है। यदि भाजपा आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार घोषित करती है तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

क्या कहता है विधानसभा का गणित?
झारखंड विधानसभा में एक राज्यसभा उम्मीदवार की जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है। महागठबंधन के पास वर्तमान में:

  • झामुमो – 34 विधायक
  • कांग्रेस – 16 विधायक
  • राजद – 4 विधायक
  • भाकपा (माले) – 2 विधायक

कुल मिलाकर 56 विधायक हैं, जो दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या मानी जाती है।

इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों की घोषणा और गठबंधन के भीतर समन्वय आने वाले दिनों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

अब सबकी नजर दूसरी सीट पर
बैद्यनाथ राम की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ झामुमो ने अपना पहला बड़ा कदम उठा दिया है। लेकिन दूसरी सीट पर उम्मीदवार कौन होगा, यह सवाल अब भी बना हुआ है। महागठबंधन की रणनीति, कांग्रेस की भूमिका और भाजपा की चालें अगले कुछ दिनों में राज्यसभा चुनाव की पूरी तस्वीर साफ कर देंगी। फिलहाल झारखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस दूसरी राज्यसभा सीट को लेकर बना हुआ है, जिस पर सभी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की निगाहें टिकी हैं।

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