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झारखंड में माओवादी फंडिंग नेटवर्क पर ED का बड़ा एक्शन, 3.87 करोड़ की 11 संपत्तियां कुर्क

ED Maoist Funding Case Jharkhand

रांची: झारखंड में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के आर्थिक नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रांची जोनल कार्यालय ने कथित टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 3.87 करोड़ रुपये मूल्य की 11 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है। एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां माओवादी संगठन के रीजनल कमांडर रविंद्र गंझू और उससे जुड़े लोगों की अवैध कमाई से खरीदी गई थीं।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ा खुलासा
ईडी के मुताबिक यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। जांच में सामने आया कि कुर्क की गई संपत्तियां रविंद्र गंझू, संतोष कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार उर्फ सोनू सिंह, मनीष कुमार, बैजनाथ गंझू और राजेश कुमार गंझू के नाम पर दर्ज हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए लेवी वसूली और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुटाई गई रकम को वैध दिखाने के लिए विभिन्न माध्यमों से निवेश किया।

7.16 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि उग्रवादी गतिविधियों और लेवी वसूली के जरिए करीब 7.16 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम में से 2.69 करोड़ रुपये नकद पहले ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा छापेमारी के दौरान बरामद किए जा चुके हैं। वहीं शेष 4.46 करोड़ रुपये को वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन में पूंजी निवेश के रूप में खपाया गया।

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कम कीमत दिखाकर खरीदी गई जमीन
ईडी के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि संपत्तियों की खरीद के दौरान सेल डीड में वास्तविक कीमत से कम मूल्य दर्शाया गया और बड़ी मात्रा में नकद भुगतान किया गया। इन पैसों से लातेहार जिले के चंदवा और कामता मौजा में 11 अचल संपत्तियां खरीदी गई थीं। अब ईडी ने इन सभी संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया है ताकि जांच पूरी होने तक इनका किसी प्रकार का लेन-देन नहीं हो सके।

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संतोष कंस्ट्रक्शन भी जांच के दायरे में
ईडी की कार्रवाई मेसर्स संतोष कंस्ट्रक्शन और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि माओवादी संगठन की अवैध कमाई को निर्माण कंपनी और अन्य कारोबारों के जरिए किस तरह वैध बनाने की कोशिश की गई।

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जांच अभी जारी
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, निवेश के स्रोत और माओवादी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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