सवाल पूछना पड़ा भारी: हजारीबाग में पत्रकार पर हमला, मंत्री की मौजूदगी में बवाल

Hazaribagh Journalist Attack

हजारीबाग: झारखंड में पत्रकार सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से तीखे सवाल पूछना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। आरोप है कि मंत्री के समर्थकों ने उनके सामने ही पत्रकार की बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

घटना उस समय हुई जब मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग में एक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। तीन भाई-बहनों के शव मिलने के बाद वह परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद जब वह मीडिया से बातचीत कर रहे थे, तभी एक पत्रकार ने उनसे चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे और पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने को लेकर सवाल पूछ लिया।

बताया जा रहा है कि यह सवाल मंत्री और उनके समर्थकों को पसंद नहीं आया। देखते ही देखते माहौल गरमा गया और हंगामा शुरू हो गया। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ समर्थक उग्र हो गए और एक टीवी पत्रकार सुशांत सोनी पर हमला कर दिया।

मंत्री और पुलिस के सामने हुई पिटाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरी घटना मंत्री और पुलिस की मौजूदगी में हुई। आरोप है कि समर्थकों ने पत्रकार को घेरकर बेरहमी से पीटा, लेकिन किसी ने बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की।

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स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मौके पर मौजूद अन्य मीडियाकर्मियों ने किसी तरह हस्तक्षेप कर घायल पत्रकार को भीड़ से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल पत्रकार का इलाज चल रहा है।

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बाबूलाल मरांडी का हमला
इस घटना के बाद झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ कार्रवाई और उनके समर्थकों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि हजारीबाग में सवाल पूछने पर पत्रकार की पिटाई बेहद चिंताजनक है और इसमें दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

पत्रकारों में आक्रोश
इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों में भी भारी आक्रोश है। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने कहा कि मंत्री के समर्थक पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं और इस घटना का राज्यव्यापी विरोध किया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि सवाल पूछना उनका अधिकार है और अगर इस तरह की घटनाएं होती रहीं, तो लोकतंत्र की मूल भावना पर आंच आएगी।

घटना की पृष्ठभूमि
पूरे विवाद की जड़ चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे से जुड़ी है। पत्रकार ने मंत्री से सवाल किया था कि हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला।
इसी सवाल के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और समर्थकों ने आक्रामक रुख अपना लिया।

प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

हजारीबाग में हुई यह घटना केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती है। ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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