...

ड्रिप सिंचाई से बदली किसानों की तकदीर: गढ़वा के होन्हे खुर्द में दो महीने में लाखों की कमाई, पलायन पर लगी रोक

Drip irrigation

ड्रिप सिंचाई से बदली होन्हे खुर्द की तस्वीर, किसानों की मेहनत बनी सफलता की मिसाल

गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल अंतर्गत कंचनपुर पंचायत का छोटा सा गांव होन्हे खुर्द आज आधुनिक कृषि तकनीक की बदौलत नई पहचान बना रहा है। कभी रोजगार और बेहतर आय के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने वाले इस गांव के किसान अब अपने खेतों में ही सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाकर यहां के किसानों ने न केवल अपनी आय कई गुना बढ़ा ली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दी है।

छत्तीसगढ़ से मिली प्रेरणा, गांव में शुरू हुआ बदलाव
होन्हे खुर्द गांव के किसान कमरुद्दीन अंसारी इस बदलाव के सूत्रधार माने जा रहे हैं। लगभग तीन वर्ष पहले वे छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में अपने रिश्तेदारों के यहां गए थे, जहां उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित आधुनिक खेती को करीब से देखा। वहां की खेती प्रणाली और किसानों की आर्थिक स्थिति से प्रभावित होकर उन्होंने अपने गांव लौटने के बाद इस तकनीक को अपनाने का फैसला किया। शुरुआत में यह प्रयोग सीमित स्तर पर किया गया, लेकिन जब परिणाम सामने आए तो गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए। धीरे-धीरे यह पहल एक सामूहिक कृषि आंदोलन का रूप लेने लगी।

20 एकड़ में हो रही आधुनिक सब्जी खेती
वर्तमान समय में गांव के लगभग 15 किसान करीब 20 एकड़ भूमि में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। इनमें फैयाज अंसारी, जब्बार अंसारी, अख्तर अंसारी, इम्तियाज अंसारी, निजामुद्दीन अंसारी, रहमतुल्ला अंसारी, उमर अंसारी, सुभान अंसारी, आशिक अंसारी, आदम अंसारी और वारिस अंसारी समेत कई किसान शामिल हैं।

इन खेतों में खीरा, करेला, टमाटर, मिर्च, लौकी और भिंडी जैसी नकदी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई के कारण पानी की बचत हो रही है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलने से उत्पादन भी बेहतर हो रहा है।

WhatsApp Image 2026 06 07 at 20.56.02
Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

दो महीने में 2 से 3 लाख रुपये तक का मुनाफा
किसानों का कहना है कि एक एकड़ में सब्जी उत्पादन पर लगभग एक लाख रुपये की लागत आती है। लेकिन फसल तैयार होने के बाद केवल दो महीने के भीतर 2 से 3 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो जाता है। पारंपरिक खेती की तुलना में यह आय कई गुना अधिक है।खेती में हुई इस आर्थिक क्रांति ने किसानों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव लाया है। जिन परिवारों को पहले आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था, वे अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

resizone elanza

गांव में बढ़ा रोजगार, पलायन हुआ कम
ड्रिप सिंचाई आधारित खेती का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय रोजगार पर पड़ा है। प्रत्येक एकड़ खेती में 10 से 12 मजदूरों को नियमित काम मिल रहा है। इससे गांव के युवाओं और मजदूरों को रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही। पहले बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते थे, लेकिन अब गांव में ही आय के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

देश के कई राज्यों तक पहुंच रही होन्हे खुर्द की सब्जियां
होन्हे खुर्द में उत्पादित सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है। यहां उगाई जाने वाली सब्जियां उत्तर प्रदेश के वाराणसी, रेणुकूट, अनपरा और ओबरा तक भेजी जा रही हैं। इसके अलावा बिहार के पटना, औरंगाबाद, भागलपुर तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता और दुर्गापुर जैसे बड़े बाजारों में भी यहां की सब्जियां पहुंच रही हैं। विशेष बात यह है कि व्यापारी स्वयं वाहनों के साथ गांव पहुंचकर किसानों से सीधे खरीदारी करते हैं। इससे किसानों को उचित मूल्य मिलता है और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हो जाती है।

सिंचाई संसाधनों की कमी बनी चुनौती
सफलता के बावजूद किसानों को कुछ बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सिंचाई के स्थायी संसाधनों का अभाव अभी भी बड़ी चुनौती है। यदि गांव के पड़वाही अहरा की गहराई बढ़ा दी जाए या खेतों में कूप एवं हाई ट्यूबवेल की व्यवस्था कर दी जाए, तो उत्पादन क्षमता और बढ़ सकती है। किसानों ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की कुसुम योजना का लाभ अभी तक उन्हें नहीं मिल पाया है। यदि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो जाए तो खेती की लागत और कम हो सकती है।

ड्रिप सिंचाई योजना में बिचौलियों की भूमिका पर सवाल
किसानों ने आरोप लगाया है कि पहले सरकारी योजनाओं के तहत ड्रिप सिंचाई पाइप निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब कुछ बिचौलियों द्वारा इसके नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। इससे किसानों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने की मांग की है।

प्रशासन ने दिया समाधान का भरोसा
इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी रुद्र प्रताप और प्रखंड विकास पदाधिकारी शुभम बेला टोपनो ने किसानों को आश्वस्त किया है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन गंभीर है। सिंचाई सुविधाओं और कृषि योजनाओं से संबंधित मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

कृषि क्षेत्र के लिए मॉडल बन सकता है होन्हे खुर्द
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार द्वारा पर्याप्त सिंचाई संसाधन, तकनीकी सहायता और कृषि योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, तो होन्हे खुर्द न केवल गढ़वा बल्कि पूरे झारखंड के लिए आधुनिक सब्जी उत्पादन का मॉडल गांव बन सकता है। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से इस गांव के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखते हैं। आज होन्हे खुर्द की यह सफलता कहानी झारखंड के हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *