पलामू में 6 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला, शाखा प्रबंधक गिरफ्तार — SIT की बड़ी कार्रवाई

Bank Scam

पलामू: झारखंड के पलामू ज़िले में करोड़ों रुपये के एक बड़े बैंक घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक (JRGB) की दंगवार शाखा में हुए 6 करोड़ रुपये से अधिक के गबन मामले में बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक मनोज कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर कई महिला समूह खातों से फर्जी ऋण स्वीकृत करने और ग्राहकों के सावधि जमा खातों से अवैध रूप से राशि निकालने के गंभीर आरोप हैं।

11 महिला समूह खातों से हुआ गबन
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि मनोज कुमार सिंह ने अपने कार्यकाल में 11 महिला समूह खातों से बिना अनुमति फर्जी ऋण स्वीकृत किए। इस आपराधिक कृत्य के ज़रिए आरोपी ने कुल 6,03,34,245 रुपये (छह करोड़ तीन लाख चौतीस हजार दो सौ पैंतालीस रुपये) की राशि का गबन किया।

आरोपी ने ग्राहकों की पहचान का दुरुपयोग करते हुए फर्जी खाते खोले और रकम को इन खातों में ट्रांसफर कर दिया। जांच शुरू होने के बाद आरोपी ने बैंक को लगभग 4.66 करोड़ रुपये लौटा दिए, लेकिन 6 करोड़ रुपये के इस गबन ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सासाराम से हुई गिरफ्तारी
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। एसडीपीओ एस. मो. याकूब के नेतृत्व में इस टीम ने कई पहलुओं पर गहन जांच की और आखिरकार 16 अक्टूबर को आरोपी मनोज कुमार सिंह को बिहार के सासाराम से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।एसडीपीओ ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। टीम ने लोकेशन ट्रेस कर उसे दबोचा। पूछताछ में आरोपी ने कई अहम जानकारियां दी हैं।

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SIT में शामिल अधिकारी
इस कार्रवाई में शामिल SIT टीम में एसडीपीओ एस. मो. याकूब (नेतृत्वकर्ता), इंस्पेक्टर गणेश नायक, अंजल निशांत, अफजल अंसारी, मुकेश कुमार, सोइक कुमार, कैलाश राम, हेमलाल सिंह और सिंघार हेमल सहित हुसैनाबाद पुलिस बल के अन्य सदस्य शामिल थे। टीम की सटीक प्लानिंग और लगातार निगरानी से यह गिरफ्तारी संभव हो पाई।

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बैंकिंग जगत में हड़कंप
इस घोटाले के सामने आने से न सिर्फ दंगवार शाखा के ग्राहकों में हड़कंप मच गया है, बल्कि पूरे बैंकिंग नेटवर्क में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने सुनियोजित तरीके से फर्जी लोन स्वीकृत कर रकम को निजी खातों में ट्रांसफर किया था। बैंक ने इस मामले में आंतरिक जांच के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई में पूरा सहयोग दिया है।ग्राहकों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि कई लोगों की सावधि जमा राशि इस घोटाले से प्रभावित हुई थी। पुलिस के अनुसार, मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।

कड़ा संदेश — गबन करने वालों पर सख्त कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि वित्तीय अपराध में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में जांच प्रक्रिया को तेज़ किया जा रहा है और जिन खातों से गबन हुआ है, उनका मिलान कर रकम रिकवर करने की दिशा में काम चल रहा है।

व्यापक जांच जारी
SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इस पूरे घोटाले को किस तरह अंजाम दिया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। जांच में बैंक के सिस्टम की खामियों को भी परखा जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

पलामू में झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक में हुआ 6 करोड़ रुपये का यह घोटाला वित्तीय संस्थानों के लिए एक बड़ा सबक है। शाखा प्रबंधक जैसे उच्च पद पर बैठा व्यक्ति जब गबन में शामिल पाया जाता है तो सुरक्षा और निगरानी की कमजोर कड़ियां उजागर होती हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपी की गिरफ्तारी तो हो गई, लेकिन इस घटना ने बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को और ज़्यादा रेखांकित कर दिया है।

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