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गरीब परिवार छठ पर्व

बोकारो/बेरमो: छठ महापर्व की पावन संध्या पर बेरमो प्रखंड में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। जब बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, एसडीओ प्रांजल ढांडा और बेरमो के सीओ मुकेश मछुआ अचानक एक साधारण गरीब परिवार के घर पहुँच गए।

यह घटना बेरमो प्रखंड के दक्षिणी पंचायत खटाल की है, जहाँ रवि निषाद नामक परिवार अपने छोटे से यू-अल्बेस्टर बने घर में खरना पूजा कर रहा था। परिवार के सदस्यों को ज़रा भी अंदाजा नहीं था कि जिले के शीर्ष अधिकारी उनके घर पहुँचकर उनके साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे।

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गरीब परिवार के घर पहुँचे शीर्ष अधिकारी
जब जिले के उपायुक्त और एसपी उनके घर में प्रवेश किए, तो पूरा माहौल भावनात्मक हो गया। घर के छोटे से आँगन में रखे प्रसाद के साथ छठव्रती महिला ने अधिकारियों को प्रणाम किया और सादगी से बने प्रसाद का भोग लगाकर उन्हें श्रद्धा पूर्वक परोसा।

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डीसी अजय नाथ झा ने प्रसाद ग्रहण करने के बाद कहा —

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“छठ महापर्व हमारे समाज की आत्मा है। इसमें न दिखावा है, न भेदभाव — बस आस्था, सादगी और अनुशासन का अद्भुत संगम है। आपकी श्रद्धा में हमारी आस्था है।”

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वहीं एसपी हरविंदर सिंह ने कहा —

“ऐसे पर्व हमें लोगों से जोड़ते हैं। यह हमें याद दिलाते हैं कि प्रशासन जनता से अलग नहीं, बल्कि उसी का हिस्सा है।”

ग्रामीणों की आंखों में खुशी और गर्व
इस अप्रत्याशित आगमन से पूरा गांव भावुक हो उठा। आसपास के लोग इस दृश्य को देखने के लिए उमड़ पड़े। परिवार ने कहा —

“यह हमारे जीवन का सबसे यादगार दिन है। इतने बड़े अधिकारी हमारे घर आए, हमारे साथ बैठे, प्रसाद खाया — यह किसी आशीर्वाद से कम नहीं।”

रवि निषाद की पत्नी, जो छठव्रती थीं, ने भावुक होकर कहा कि अधिकारीगणों की उपस्थिति ने उनके व्रत और परिवार को विशेष बना दिया। यह पल उनके लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक बन गया।

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छठ की सादगी और जनभावना का प्रतीक बना यह पल
इस घटना ने यह साबित किया कि छठ पूजा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जन-आस्था, सादगी और समानता का उत्सव है। जहां गरीब और अमीर, दोनों एक साथ सूर्य उपासना करते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल को ‘जनसंवेदनशीलता की मिसाल’ बताया और कहा कि यह दृश्य आने वाले वर्षों तक लोगों की यादों में ज़िंदा रहेगा।

इस दृश्य ने एक बार फिर दिखाया कि जब प्रशासन जनता के साथ खड़ा होता है, तब शासन और समाज के बीच की दूरी खुद-ब-खुद मिट जाती है।
छठ की संध्या पर यह मिलन — आस्था, सादगी और संवेदना का सुंदर संगम बन गया।

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