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केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत को बनाया भारत का 53वां मुख्य न्यायाधीश

Justice Surya Kant

मुनादी LIVE : केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में नियुक्त करने की औपचारिक प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। उनके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत लगभग 14 माह के कार्यकाल के लिए सुप्रीम कोर्ट की कमान संभालेंगे।

न्याय मंत्रालय ने मांगी सिफारिश
कानून एवं न्याय मंत्रालय ने मौजूदा सीजेआई गवई को पत्र लिखकर उनके उत्तराधिकारी के नाम की अनुशंसा करने का अनुरोध किया है। भारतीय न्यायपालिका की परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही अगले सीजेआई के रूप में नामित किया जाता है। इस परंपरा के अनुरूप अब न्यायमूर्ति सूर्यकांत का नाम लगभग तय माना जा रहा है। यह नियुक्ति न केवल न्यायिक व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करेगी, बल्कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत के तीन दशकों से अधिक लंबे न्यायिक सफर और ईमानदार नेतृत्व को भी रेखांकित करेगी।

साधारण परिवार से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेतवार गांव में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, हिसार से 1981 में प्राप्त की और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से 1984 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। वकालत की शुरुआत उन्होंने हिसार जिला न्यायालय से की और कुछ ही वर्षों में अपने तर्कशील और मानवीय दृष्टिकोण के कारण कानूनी जगत में पहचाने जाने लगे।

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हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने
1990 के दशक में सूर्यकांत हरियाणा सरकार के सबसे युवा महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) बने। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की ओर से कई संवैधानिक, प्रशासनिक और सामाजिक मामलों में प्रभावी पैरवी की। उनकी न्यायिक दृष्टि और गहराई ने जल्द ही उन्हें न्यायपालिका के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बना दिया।

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2004 में हाईकोर्ट जज बने, ऐतिहासिक फैसले दिए
साल 2004 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। यहां उन्होंने मानवाधिकार, महिला न्याय, जेल सुधार और शिक्षा से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले दिए। उनके चर्चित निर्णयों में ‘जसवीर सिंह बनाम पंजाब राज्य’ केस शामिल है, जिसमें उन्होंने कैदियों के लिए पारिवारिक और दांपत्य मुलाकात की अनुमति देने का आदेश दिया — जो भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक बना।

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट तक
2018 में न्यायमूर्ति सूर्यकांत को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। हालांकि, उस समय कॉलेजियम की सिफारिश पर कुछ मतभेद उभरे थे, फिर भी उनकी नियुक्ति पर कायम रहते हुए उन्हें पदभार सौंपा गया। सिर्फ एक वर्ष बाद, 9 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। 24 मई 2019 को उन्होंने शपथ ली और शीर्ष अदालत के सबसे युवा जजों में से एक बन गए।

सुप्रीम कोर्ट में 80 से अधिक अहम फैसले
न्यायमूर्ति सूर्यकांत अब तक 80 से अधिक प्रमुख फैसलों की अध्यक्षता या सह-निर्णय कर चुके हैं और 1000 से अधिक बेंचों का हिस्सा रहे हैं। उनके कुछ उल्लेखनीय निर्णय हैं:

  • पेगासस जासूसी प्रकरण (2021): उन्होंने जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया।
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बनाम नरेश अग्रवाल (2024): उन्होंने सात सदस्यीय बेंच में शामिल होकर अल्पसंख्यक आरक्षण नीति पर निर्णय में भूमिका निभाई।
  • सेडिशन कानून (धारा 124ए): सुनवाई के दौरान उन्होंने जांच पर रोक लगाने का आदेश दिया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक कदम था।

नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में गरीबों की आवाज़
मई 2025 में उन्हें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
इस भूमिका में उन्होंने गरीब, पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए कई पहल कीं।

शिक्षा और न्यायिक दर्शन
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 2011 में एलएलएम में प्रथम श्रेणी प्राप्त की और कानूनी शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं में सक्रिय रहे। वे भारतीय विधि संस्थान की कई समितियों के सदस्य हैं और अंतरराष्ट्रीय विधिक सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का नाम भारतीय न्यायपालिका में कर्मनिष्ठा, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का पर्याय बन चुका है।
देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति न केवल न्याय प्रणाली की निरंतरता सुनिश्चित करेगी, बल्कि यह उम्मीद भी जगाएगी कि उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट न्याय, समानता और संवेदनशील शासन की दिशा में नई ऊँचाइयाँ छुएगा।

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