होर्मुज स्ट्रेट में तनाव, ईरानी बलों ने जहाज रोका; भारतीय समेत 21 क्रू मेंबर फंसे
IRGC की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय चिंता, भारत से हस्तक्षेप की मांग
मुनादी लाइव : मिडिल ईस्ट के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। IRGC ने भारत की ओर आ रहे एक कंटेनर जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहरा गई है। इस जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर सवार हैं, जिनमें भारत के भी नागरिक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी मर्चेंट नेवी अधिकारी संजय माहर भी इस जहाज पर मौजूद हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कंटेनरशिप होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी ईरानी बलों ने इसे रोक लिया। IRGC का कहना है कि जहाज के नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। हालांकि, जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर्स का दावा है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति का इंतजार कर रहे थे और किसी तरह की नियम उल्लंघन की स्थिति नहीं थी।
भारतीय क्रू मेंबर को लेकर चिंता
इस घटना के बाद भारत में भी चिंता का माहौल है। संजय माहर के परिवार ने सरकार से अपील की है कि उनके सुरक्षित वापसी के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं। परिवार का कहना है कि उन्हें जहाज पर मौजूद स्थिति को लेकर सीमित जानकारी मिल रही है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हलचल
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी जहाज को रोकना या कब्जे में लेना वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन जाता है। इस घटना के बाद कई देशों ने अपने-अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई हुई है। पिछले कुछ वर्षों में भी होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को रोके जाने या हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
भारत समेत कई देशों में इस घटना के बाद सरकार से कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को सुलझाने के लिए बातचीत और अंतरराष्ट्रीय दबाव दोनों जरूरी होते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि मिडिल ईस्ट में हालात कितने संवेदनशील बने हुए हैं।





