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पेट्रोल-डीजल 25-28 रुपये महंगा होगा? सरकार ने दी बड़ी सफाई

Petrol diesel price hike

रिपोर्ट में बढ़ोतरी का दावा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया ‘फेक’

मुनादी लाइव : पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा तेज है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले महीने पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि इस दावे पर अब केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब सामने आ गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए ‘फेक’ बताया है और कहा है कि फिलहाल कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतों में उछाल
दरअसल, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। कभी 70-75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने वाला क्रूड ऑयल अब 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है, जबकि कुछ समय के लिए यह 115 डॉलर प्रति बैरल तक भी गया।इसका असर अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में दिखा, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है।

रिपोर्ट में क्या किया गया दावा?
ब्रोकरेज फर्म Kotak Institutional Equities की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के कारण फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखा गया है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियां 25-28 रुपये प्रति लीटर तक कीमत बढ़ा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बढ़ोतरी एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे की जा सकती है।

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सरकार ने किया साफ इनकार
इन दावों के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए बयान जारी कर कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।सरकार ने यह भी कहा कि पिछले चार वर्षों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखा गया है।

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तेल कंपनियों पर बढ़ता दबाव
हालांकि, यह भी सच है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों पर हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। वहीं, भारत का इंपोर्ट बिल भी बढ़ गया है और रोजाना 190-210 मिलियन डॉलर तक अतिरिक्त खर्च हो रहा है। होर्मुज संकट की वजह से शिपिंग और इंश्योरेंस कॉस्ट भी बढ़ गई है, जिससे तेल आयात और महंगा हो गया है।

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सप्लाई और मांग का असर
ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने से कच्चे तेल की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत का क्रूड इंपोर्ट वॉल्यूम लगभग 15 फीसदी तक घटा है। ऐसे में आने वाले समय में कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है, लेकिन फिलहाल सरकार ने किसी भी बढ़ोतरी से साफ इनकार किया है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपये की बढ़ोतरी की खबर ने आम लोगों के बीच चिंता जरूर बढ़ा दी थी, लेकिन सरकार की ओर से दिए गए स्पष्ट बयान के बाद फिलहाल राहत की स्थिति है। हालांकि वैश्विक हालात को देखते हुए भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन अभी के लिए आम जनता को किसी बड़ी कीमत बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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