झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियाँ तेज, आयोग ने दी महत्वपूर्ण हिदायतें

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Ranchi : झारखंड में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गई है। वर्ष 2024–25 की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन कार्यालय एक भी योग्य मतदाता को सूची से छूटने नहीं देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने शुक्रवार को पूरे राज्य के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राज्य के हर जिले में BLOs द्वारा मतदाता सूची की सही मैपिंग, गलतियों के सुधार और नए मतदाताओं के सत्यापन का कार्य समय पर और पूर्णतः सटीकता के साथ हो।

दूसरे राज्यों के पुराने वोटरों को लेकर उठी चिंता
गहन पुनरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी चिंता उन मतदाताओं को लेकर उभरकर सामने आई है, जो वर्ष 2003 के पुनरीक्षण में अन्य राज्यों की वोटर लिस्ट में शामिल थे, लेकिन बाद में झारखंड में वोटर बन गए। नए नियम और सुधार अभियान के कारण ऐसे मतदाताओं को आशंका है कि उनका नाम कहीं ग़लती से हट न जाए।

CEO के. रवि कुमार ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मतदाता अपने पुराने राज्य की पुनरीक्षण सूची में अपना नाम ढूंढ सकते हैं और उसे BLO को दिखाकर किसी भी भ्रम का समाधान कर सकते हैं। इसके लिए मतदाता 1950 हेल्पलाइन पर कॉल कर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और CEO झारखंड वेबसाइट पर पिछले पुनरीक्षण की वोटर लिस्ट सर्चेबल फॉर्मेट में उपलब्ध है, जिससे कोई भी मतदाता आसानी से अपने नाम की पुष्टि कर सकता है।

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BLO ऐप में की जा रही मैपिंग प्रक्रिया महत्वपूर्ण
CEO ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि BLO ऐप में पुराने पुनरीक्षण की वोटर लिस्ट और वर्तमान सूची की मैपिंग सटीक रूप से की जाए। इस दौरान दूसरे राज्यों से आए मतदाताओं की मैपिंग का रिकॉर्ड मैन्युअल रजिस्टर में भी रखा जाए, जिससे पुनरीक्षण अवधि में कोई जटिलता या गलती न हो।

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उन्होंने यह भी कहा कि BLOs को फील्ड में वास्तविक स्थिति के अनुसार काम करना है, और यदि आवश्यक हो तो घर-घर जाकर सत्यापन करना चाहिए।

“एक भी योग्य मतदाता छूटे नहीं”—CEO की अहम अपील
बैठक के दौरान के. रवि कुमार ने सभी उप निर्वाचन पदाधिकारियों से स्पष्ट कहा कि गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में किसी भी योग्य मतदाता का नाम अनदेखा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पैरेंटल मैपिंग तथा ASD (Absentee, Shifted, Dead) सूची बनाते समय आयोग द्वारा निर्धारित सभी नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। इसके लिए निरीक्षण की प्रक्रिया भी बहु-स्तरीय होगी, जिसमें जिला, राज्य और आयोग—सभी स्तरों पर क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा।

ऑनलाइन प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
बैठक के दौरान PPT के माध्यम से अधिकारियों को पिछले SIR से वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग, निरीक्षण पद्धति और प्रमुख सावधानियों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। CEO ने कहा कि डिजिटल टूल्स की मदद से गहन पुनरीक्षण और भी पारदर्शी और प्रभावी बनेगा। BLOs को ऐप-आधारित रिपोर्टिंग सही ढंग से करनी होगी ताकि डेटा में कोई विसंगति न रह जाए।

बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर सहित सभी जिलों के अधिकारी ऑनलाइन मौजूद थे।

जनता के लिए अपील: नाम की जाँच ज़रूर करें
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं से भी अपील की है कि वे अपनी वोटर लिस्ट की स्थिति स्वयं अवश्य जांच लें और किसी भी गलत सूचना या नाम गायब होने की स्थिति में तत्काल अपने BLO या स्थानीय चुनाव कार्यालय से संपर्क करें।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है, और पुनरीक्षण के दौरान जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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