JAC की संशोधन प्रक्रिया में छात्रों की मुश्किलों पर सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा का हस्तक्षेप, अध्यक्ष को लिखा पत्र
रांची: झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्रों में संशोधन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित किए जाने के बीच छात्रों के सामने उत्पन्न व्यावहारिक समस्याओं को लेकर राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने अहम पहल की है। उन्होंने झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर हजारों विद्यार्थियों को हो रही प्रशासनिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है और छात्रहित में तत्काल व्यावहारिक समाधान लागू करने की मांग की है।
सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जिनके मैट्रिक और इंटरमीडिएट दोनों प्रमाण-पत्रों में त्रुटियां हैं। वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में संशोधन के लिए मैट्रिक का मूल प्रमाण-पत्र जमा करना अनिवार्य है। लेकिन जिन छात्रों ने पहले ही मैट्रिक प्रमाण-पत्र संशोधन के लिए अपने मूल दस्तावेज परिषद कार्यालय में जमा कर दिए हैं, वे समय-सीमा के भीतर इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में संशोधन के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में मैट्रिक प्रमाण-पत्र संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने में कई महीने लग जाते हैं। ऐसे में छात्र अंतिम तिथि से पहले इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र संशोधन का आवेदन करने से वंचित हो सकते हैं, जिससे उनके उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े अवसर प्रभावित होने की आशंका है।

सांसद ने दिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने परिषद को छात्रहित में तीन प्रमुख सुझाव दिए हैं— जिन विद्यार्थियों ने मैट्रिक प्रमाण-पत्र संशोधन के लिए आवेदन कर दिया है, उन्हें आवेदन की रसीद, मनी रसीद, चालान या उसकी सत्यापित प्रति के आधार पर इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में संशोधन हेतु आवेदन करने की अनुमति दी जाए। जिन मामलों में मैट्रिक संशोधन लंबित है, उनके लिए इंटरमीडिएट संशोधन आवेदन स्वीकार करने संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। आवश्यकता पड़ने पर JAC अधिसूचना संख्या 48/2025 में संशोधन अथवा स्पष्टीकरण जारी कर इस व्यावहारिक समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
छात्र हित में त्वरित निर्णय की मांग
सांसद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण कोई भी पात्र विद्यार्थी अपने शैक्षणिक या प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े भविष्य के अवसरों से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि छात्रहित और प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए इस मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाए।

विद्यार्थियों को राहत की उम्मीद
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा की इस पहल को उन हजारों छात्रों के लिए राहत की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जो प्रमाण-पत्र संशोधन की प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। यदि परिषद सांसद के सुझावों पर अमल करती है, तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को समय रहते अपने दस्तावेजों में संशोधन कराने का अवसर मिल सकेगा।





